विज्ञापन
बिहार में सरकारी आवास को लेकर छिड़ा सियासी विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लालू परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी बंगला किसी की निजी संपत्ति नहीं है।

Bihar News : बिहार में सरकारी आवास को लेकर छिड़ा सियासी विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लालू परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी बंगला किसी की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता में रहने वाले लोगों को सरकारी सुविधाओं से मोह नहीं होना चाहिए और सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को नियमों का सम्मान करना चाहिए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि वह स्वयं को जनता का सेवक मानते हैं, मालिक नहीं। उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी नेतृत्व या गठबंधन का निर्देश मिलेगा, वह 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री आवास खाली कर अपने निजी घर चले जाएंगे। उनके अनुसार सरकारी आवास केवल पद की गरिमा से जुड़ा होता है, किसी व्यक्ति या परिवार की स्थायी जागीर नहीं है। Bihar News
दरअसल, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड का सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया गया है। बिहार राज्य के भवन निर्माण विभाग ने यह आवास मत्स्य एवं दुग्ध विकास मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। इसके बदले राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया है। विभाग की ओर से उन्हें कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और आवास खाली करने के लिए निर्धारित समय भी दिया गया है। इसके बावजूद उन्होंने फिलहाल बंगला छोड़ने से इनकार कर दिया है, जिससे यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का कहना है कि वह दबाव में आकर आवास खाली नहीं करेंगी। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि प्रशासन में दम है तो उन्हें हटाकर दिखाए। वहीं उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। राजद नेताओं का आरोप है कि सरकार विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर रही है, जबकि सत्तापक्ष इसे नियमों के अनुपालन का मामला बता रहा है। Bihar News
बिहार में सरकारी आवास को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी सरकारी बंगले को लेकर विवादों में घिर चुके हैं। महागठबंधन सरकार के दौरान उन्हें उपमुख्यमंत्री के रूप में आवंटित सरकारी आवास खाली करने को कहा गया था, लेकिन मामला अदालत तक पहुंच गया था। बाद में न्यायालय ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए तेजस्वी यादव पर जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद उन्हें आवास खाली करना पड़ा था। Bihar News
विज्ञापन