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बुधवार 15 अप्रैल 2026 को भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। भारत के प्रमुख राज्य बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई नेता मुख्यमंत्री बना है। बुधवार को बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) ने शपथ ले ली है।

Samrat Chaudhary : बुधवार 15 अप्रैल 2026 को भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। भारत के प्रमुख राज्य बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई नेता मुख्यमंत्री बना है। बुधवार को बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) ने शपथ ले ली है। भाजपा के नेताओं का दावा है कि सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। यह बात पूरी तरह से सच नहीं है कि सम्राट चौधरी(Samrat Chaudhary) भाजपा के नेता हैं। सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) का भाजपा का नेता होना आधा सत्य है। Samrat Chaudhary
आपको बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary )मूल रूप से भाजपा के नेता नहीं हैं। भाजपा ने सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) को बिहार की सबसे बड़ी पार्टी रही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से इम्पोर्ट किया हुआ है। उससे पहले सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) जनता दल यूनाईटेड (JDU) में भी रह चुके हैं। सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) ने वर्ष 1990 में आरजेडी (RJD) से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। अभी केवल 8 साल ही हुए हैं। जब सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) आरजेडी (RJD ) को छोडक़र भाजपा के नेता बने थे। सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) को भाजपा में लाने में भाजपा के दिग्गज नेता अमित शाह की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary )भाजपा में आरजेडी (RJD) से इम्पोर्ट करके लाए गए थे। Samrat Chaudhary
राजनीतिक विश£ेषकों का मत है कि सम्राट चौधरी.(Samrat Chaudhary ) को बिहार का मुख्यमंत्री बहुत सोच समझकर बनाया गया है। विश्लेषक बता रहे हैं कि बिहार की जमीनी हकीकत के कारण सम्राट चौधरी(Samrat Chaudhary ) को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की बड़ी मजबूरी थी। भाजपा के पास बिहार में सम्राट चौधरी(Samrat Chaudhary ) ही एकमात्र ऐसे नेता थे जो बिहार की जातिवादी राजनीति से लेकर पूरे प्रदेश में पहचान रखते हैं। जाति वाले समीकरण में फिट बैठने के कारण ही आरजेडी... से इम्पोर्ट किए गए सम्राट चौधरी(Samrat Chaudhary ) को बिहार प्रदेश का मुख्यमंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद सौंपा गया है। Samrat Chaudhary
बिहार की राजनीति के जानकारों का कहना है कि ‘‘भाजपा की मजबूरी है, सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) जरूरी है’’। राजनीतिक विश्लेषक अपनी इस बात को समझाने के लिए कहते हैं कि भाजपा के पास बिहार में जीवन भर भाजपाई रहने वाले अनेक नेता हैं। मजबूरी यह है कि मूल रूप से भाजपा वाले नेता बिहार के सारे राजनीतिक समीकरणों में फिट नहीं बैठते हैं। भाजपा के पास मुख्यमंत्री बनने लायक नित्यानंद राय, गिरिराज सिंह, विजय कुमार सिन्हा तथा मंगल पांडे जैसे नेता थे। भाजपा की समस्या यह रही कि भाजपा के इन तमाम नेताओं की सीमाएं हैं। इनमें से कोई नेता एक इलाके तक सिमटा है, तो किसी की छवि इतनी कडक़ है कि हर वर्ग उनसे नहीं जुड़ पाता। मंगल पांडे जैसे नेता प्रशासन चलाने में तो माहिर हैं। बीजेपी को एक ऐसा चेहरा चाहिए था जो सडक़ पर उतरकर विपक्ष को सीधी टक्कर दे सके। बस यहीं पर सम्राट चौधरी बाजी मार ले गए। Samrat Chaudhary
आपको बता दें कि बिहार में मुख्यमंत्री बनाए गए सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary )कुशवाहा समाज से आते हैं, कुशवाहा समाज बिहार में पिछड़ों का एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। भाजपा को पता है कि अगर उसे बिहार में अपने दम पर सत्ता लानी है, तो उसे गैर-यादव पिछड़ों को अपने पाले में लाना ही होगा। 2020 के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन फिर भी वह नीतीश कुमार के पीछे रही। अब सम्राट चौधरी(Samrat Chaudhary ) के जरिए भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह अब किसी के भरोसे नहीं, बल्कि अपने दम पर आगे बढऩा चाहती है। सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) ने भाजपा में शामिल होने के बाद बहादुर तथा लडाकू नेता की छवि बनाई है। मुख्यमंत्री बनवाने में सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary ) की वह छवि खूब काम आई है। Samrat Chaudhary
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