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बिहार की राजनीति ने एक नया मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता में एक नई शुरुआत का संकेत दे दिया है। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

Bihar News : बिहार की राजनीति ने एक नया मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता में एक नई शुरुआत का संकेत दे दिया है। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। समर्थकों ने उन्हें “बुलडोजर बाबा” कहना शुरू कर दिया, और इसी के साथ यह सवाल उठने लगा कि क्या अब बिहार में भी उत्तर प्रदेश जैसी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली देखने को मिलेगी। पटना में शपथ ग्रहण के बाद जो माहौल बना, उसने इस चर्चा को और हवा दे दी। लोकभवन के बाहर समर्थकों ने जोरदार नारे लगाए और सम्राट चौधरी की छवि एक ऐसे नेता के रूप में उभरती दिखी, जो कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कड़ा रुख अपना सकते हैं। Bihar News
बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ चेहरे का बदलाव नहीं है, बल्कि सत्ता संरचना में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है। लंबे समय से राज्य की सत्ता में भागीदार रहने के बावजूद भाजपा को पहली बार मुख्यमंत्री पद मिला है। अब तक एनडीए की सरकारों का नेतृत्व मुख्य रूप से नीतीश कुमार के हाथों में रहा, लेकिन उनके राज्यसभा जाने के बाद भाजपा को पहली बार राज्य की कमान सीधे संभालने का मौका मिला है। सम्राट चौधरी पर भाजपा नेतृत्व ने भरोसा जताया और उन्हें बिहार का नया चेहरा बनाकर आगे किया। पार्टी के भीतर उनकी स्थिति पहले से मजबूत रही है और सरकार में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उनका मुख्यमंत्री बनना भाजपा की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। Bihar News
सम्राट चौधरी की पहचान लंबे समय से तेजतर्रार और आक्रामक नेता के रूप में रही है। गृह विभाग की जिम्मेदारी संभालते वक्त उन्होंने अपराध और अपराधियों के खिलाफ कई बार सख्त भाषा का इस्तेमाल किया। उनके बयानों ने समर्थकों के बीच यह संदेश दिया कि वे कानून-व्यवस्था के मामले में नरम रुख अपनाने वालों में नहीं हैं। अब जब मुख्यमंत्री की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है, तब स्वाभाविक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार ज्यादा आक्रामक हो सकती है। बिहार में हत्या, लूट, डकैती और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दे हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे अपनी सख्त छवि को जमीन पर असरदार प्रशासन में बदल पाते हैं या नहीं। बीते कुछ महीनों में बिहार के अलग-अलग इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने खासा ध्यान खींचा है। राजधानी पटना से लेकर सीमावर्ती जिलों तक प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर चलाए हैं। इसी वजह से अब नई सरकार के गठन के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि ऐसे अभियानों में और तेजी आ सकती है। Bihar News
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जहां भाजपा समर्थकों में उत्साह है, वहीं विपक्ष ने भी हमला तेज कर दिया है। वाम दलों और अन्य विपक्षी नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि वे बिहार में किसी भी तरह के “बुलडोजर राज” का विरोध करेंगे। सीपीआई माले ने तो यहां तक आरोप लगाया कि भाजपा बिहार को एक ऐसे मॉडल की ओर ले जाना चाहती है, जहां प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर दमनकारी राजनीति को बढ़ावा मिले। विपक्ष का कहना है कि बिहार की पहचान लोकतांत्रिक प्रतिरोध की रही है और यहां की जनता किसी भी एकतरफा या डर पैदा करने वाली राजनीति को आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। इस तरह साफ है कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार में सत्ता और विपक्ष के बीच नई वैचारिक लड़ाई भी शुरू हो गई है। Bihar News
“योगी मॉडल” दरअसल उस प्रशासनिक शैली को कहा जाता है, जो उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के दौरान चर्चा में रही। इस मॉडल की सबसे बड़ी पहचान अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाना, तेज पुलिसिंग और कठोर प्रशासनिक संदेश रही है। भाजपा समर्थक इसे मजबूत शासन का प्रतीक मानते हैं, जबकि विरोधी दल और मानवाधिकार समूह इसे कई बार असंवैधानिक और कठोर बताते रहे हैं। Bihar News
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