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बिहार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार से जुड़ी बड़ी खबर यह है कि बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। सियासी अटकलों के बीच एनडीए ने आखिरकार नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगा दी है। सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री घोषित किया गया है।

Bihar News : बिहार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार से जुड़ी बड़ी खबर यह है कि बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल गया है। सियासी अटकलों के बीच एनडीए ने आखिरकार नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगा दी है। सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। इसके साथ ही सम्राट चौधरी बिहार के 24 वें मुख्यमंत्री बन गए है। Bihar News
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर विरासत और अनुभव का दिलचस्प संगम रहा है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं, और उसी माहौल में सम्राट चौधरी ने राजनीति की बारीकियां सीखीं। दिलचस्प बात यह है कि आज जिन नेताओं और दलों के खिलाफ सम्राट चौधरी मुखर रहते हैं, कभी वहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई थी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ अपने सार्वजनिक जीवन का आगाज किया और लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में सक्रिय राजनीति के शुरुआती पाठ सीखे। समय के साथ उनके राजनीतिक विचार और रास्ते बदले, लेकिन यही शुरुआती दौर उनके सियासी सफर की मजबूत नींव साबित हुआ। Bihar News
सम्राट चौधरी का सियासी सफर जितना तेज रहा, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा। बेहद कम उम्र में मंत्री पद तक पहुंचने वाले सम्राट चौधरी उस दौर में बिहार की राजनीति में तेजी से उभरते चेहरे के रूप में देखे गए थे। कहा जाता है कि उन्हें पहली बार बहुत कम उम्र में मंत्रिमंडल में जगह मिली, जिसने उस समय राजनीतिक हलकों में खासा ध्यान खींचा। लेकिन यही शुरुआती उपलब्धि आगे चलकर बड़े विवाद का कारण भी बनी। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, उस समय उनकी उम्र को लेकर सवाल खड़े हुए और मामला इतना बढ़ा कि उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर तक करना पड़ा। वह तत्कालीन आरजेडी सरकार में कृषि राज्य मंत्री के रूप में शामिल थे। चर्चा यह भी रही कि उनके लिए एक विशेष विभाग का गठन किया गया था, जिससे उनकी राजनीतिक अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, मंत्री बनने के साथ ही उनकी उम्र को लेकर उठे सवालों ने पूरे घटनाक्रम को सियासी बहस के केंद्र में ला दिया। दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि उस समय जिन राजनीतिक ताकतों ने उनकी उम्र के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया, आगे चलकर सम्राट चौधरी ने उसी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर अपनी अलग पहचान बनाई। बाद के वर्षों में उन्होंने भाजपा में खुद को मजबूत नेता के तौर पर स्थापित किया, लेकिन उनके राजनीतिक जीवन का शुरुआती अध्याय उम्र से जुड़े इस विवाद के कारण लंबे समय तक चर्चा में बना रहा। बताया जाता है कि वर्ष 1999 में उम्र संबंधी विवाद सामने आने के बाद तत्कालीन राज्यपाल ने उन्हें बिहार कैबिनेट से हटाने का फैसला किया था। उस समय उनके अलग-अलग दस्तावेजों में उम्र को लेकर विरोधाभास की बातें सामने आई थीं, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया। यही वजह रही कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया। Bihar News
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