सम्राट मिहिर भोज की जयंती आज 13 सितंबर को मनाई जा रही है। जानिए उनका इतिहास, शासनकाल, साम्राज्य विस्तार और इंटरनेशनल गुर्जर डे पर होने वाले देश-विदेश के आयोजन।

गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की जन्म जयंती आज यानी 13 सितंबर को मनाई जा रही है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी गुर्जर समाज की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सम्राट मिहिर भोज की जयंती के अवसर पर सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के जरिए उनके इतिहास, शौर्य और योगदान को याद किया जा रहा है। 13 सितंबर को इंटरनेशनल गुर्जर डे के रूप में भी आयोजन किए जाते हैं। इस मौके पर दिल्ली एनसीआर समेत कई जगहों पर शोभायात्रा, हवन, कीर्तन, भंडारे और सम्मान समारोह आयोजित किए जाने हैं।
इंटरनेशनल गुर्जर डे का आयोजन गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की जयंती के अवसर पर किया जाता है। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर के अनुसार, इस दिन देश और विदेश में रहने वाले गुर्जर समाज के लोग सम्राट मिहिर भोज को याद करते हुए अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस वर्ष इन आयोजनों की थीम बटेश्वर मंदिर मुरैना रखी गई है। सम्राट मिहिर भोज की जयंती के अवसर पर कई राज्यों में शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। विभिन्न मंदिरों में हवन और कीर्तन के कार्यक्रम होंगे। आयोजन स्थलों पर खीर-पूरी के भंडारे और शरबत वितरण किया जाएगा। जरूरतमंद लोगों को कपड़े और फल देने के कार्यक्रम भी रखे गए हैं। इसके अलावा समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।
सम्राट मिहिर भोज को 9वीं शताब्दी के गुर्जर प्रतिहार राजवंश के प्रमुख और शक्तिशाली शासकों में गिना जाता है। दी गई जानकारी के अनुसार उन्होंने लगभग 836 ईस्वी से 885 ईस्वी तक शासन किया। उनका शासनकाल करीब 49 वर्षों का बताया जाता है। उनके साम्राज्य की राजधानी कन्नौज थी, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित है। बताया जाता है कि मिहिर भोज का जन्म विक्रम संवत 873 यानी 816 ईस्वी में भादो मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को वराह जयंती के दिन हुआ था। उनके प्रमुख नामों में मिहिर, भोज, आदिवराह और प्रभास शामिल बताए जाते हैं। उन्होंने करीब 20 वर्ष की आयु में राज सिंहासन संभाला था।
मिहिर भोज के शासनकाल में गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य का प्रभाव काफी व्यापक क्षेत्र में बताया जाता है। जानकारी के अनुसार उनका राज्य उत्तर में हिमालय की तराई से लेकर दक्षिण में नर्मदा नदी तक और पश्चिम में मुल्तान से पूर्व में बंगाल की सीमा तक फैला हुआ था। यही वजह है कि उनके शासनकाल को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जाता है।
सम्राट मिहिर भोज को उनकी सैन्य शक्ति के लिए भी याद किया जाता है। अरब यात्री सुलेमान और इतिहासकार अल मसूदी के यात्रा वृत्तांतों के आधार पर दी गई जानकारी में उनके पास एक विशाल और सुव्यवस्थित सेना होने का उल्लेख मिलता है। इस सेना में घुड़सवार, पैदल सैनिक और हाथी शामिल थे। मिहिर भोज के शासनकाल में व्यापार और राज्य की समृद्धि का भी उल्लेख मिलता है। उस समय सोने और चांदी के सिक्कों का इस्तेमाल होता था और राज्य में शांति तथा सुरक्षा का वातावरण होता था। उनके शासन और सैन्य व्यवस्था की चर्चा उनके ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए की जाती है।
सम्राट मिहिर भोज की जयंती को लेकर इस बार देश के कई हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली एनसीआर में भी अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रमों की तैयारियां की गई हैं। दिल्ली के बाबा श्याम गिरी मंदिर में शोभायात्रा और भंडारे का आयोजन होगा। दिल्ली के फतेहपुर बेरी में शहीद स्मारक पर सभा आयोजित की जाएगी। फरीदाबाद में गांव पाली से सेक्टर 16 स्थित गुर्जर भवन तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। गुड़गांव के गुर्जर भवन में कार्यक्रम का आयोजन होगा। गाजियाबाद के कवि नगर स्थित गुर्जर भवन में सभा रखी गई है। वहीं ग्रेटर नोएडा के मिहिर भोज कॉलेज में भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस वर्ष सम्राट मिहिर भोज की जयंती और इंटरनेशनल गुर्जर डे के आयोजनों में बटेश्वर मंदिर मुरैना को थीम बनाया गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले गुर्जर समाज के लोग भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक गतिविधियों और सम्मान समारोहों के जरिए भी इस दिन को मनाया जा रहा है।
सम्राट मिहिर भोज की जयंती के मौके पर होने वाले आयोजनों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सरोकारों को भी शामिल किया गया है। कई जगहों पर हवन, कीर्तन, शोभायात्रा और भंडारे होंगे। लोगों को शरबत वितरित किया जाएगा। जरूरतमंदों को कपड़े और फल देने के कार्यक्रम भी होंगे। समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित करने की तैयारी है। सम्राट मिहिर भोज की जयंती हर साल विक्रमी संवत के भादो मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी तीज के अवसर पर मनाई जाती है। इस अवसर पर उनके इतिहास और योगदान को याद करते हुए देश और विदेश में रहने वाले गुर्जर समाज के लोग विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।
सम्राट मिहिर भोज के इतिहास और उनकी पहचान को लेकर अलग-अलग सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भों में चर्चा होती रही है। उपलब्ध जानकारी में उन्हें गुर्जर प्रतिहार राजवंश का शासक माना गया है। इसी ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए गुर्जर समाज की ओर से हर साल उनकी जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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