छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले संजय दहरिया ने अपनी जिदगी के सबसे कठिन दौर को पार करके यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।

UPSC Toppers : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले संजय दहरिया ने अपनी जिदगी के सबसे कठिन दौर को पार करके यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। संजय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की। परिवार का आर्थिक हाल और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद, उन्होंने कभी पढ़ाई में रुचि खोई नहीं। कक्षा 5 तक पहुंचने के बाद उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय (माना, रायपुर) में शिक्षा जारी रखने का अवसर मिला, जहाँ उन्होंने अपने अकादमिक कौशल को और निखारा।
2012 में संजय को सलाइवरी ग्रंथि (सलाईवरी ग्लैंड) का कैंसर हुआ। इलाज और रिकवरी में उन्हें लगभग 6 साल का कठिन समय लगा। इस दौरान उन्होंने कई बार हिम्मत खोने का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। यह समय उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था, जिसने उनकी मानसिक और शारीरिक शक्ति को परखा।
इलाज के बाद संजय ने स्टेट बैंक आफ इंडिया और स्थानीय डाकघर में नौकरी की। लेकिन उनका सपना लोक सेवा में योगदान देने का था। तीन सरकारी नौकरियों को छोड़कर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी को प्राथमिकता दी। संजय ने लगातार मेहनत और रणनीति के साथ तैयारी जारी रखी। पहले दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मेहनत का फल पाया। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि असफलता भी सिर्फ एक कदम पीछे हटने का नाम है, हार का नहीं। कैंसर के इलाज के कारण उनकी दृष्टि पर भी असर पड़ा था। फिर भी, संजय ने कभी पढ़ाई से हाथ नहीं हटाया। उन्होंने साबित किया कि शारीरिक कठिनाइयाँ किसी भी लक्ष्य को रोक नहीं सकतीं, अगर मानसिक दृढ़ता मजबूत हो।
सफलता के बाद संजय ने कहा कि उनका उद्देश्य देश और समाज की सेवा करना है। चाहे उन्हें आईएएस का कैडर मिले या अन्य कोई लोक सेवा, उनकी प्रतिबद्धता और उत्साह अडिग है। संजय दहरिया की कहानी हमें यह सिखाती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि आपके अंदर आत्मविश्वास, धैर्य और मेहनत है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उनकी यात्रा युवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।