Satyapal Malik : सत्यपाल मलिक के समर्थन में उठी आवाज, यह कैसा न्याय है
Satyapal Malik
भारत
चेतना मंच
23 May 2025 07:50 PM
Satyapal Malik : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं अनेक मुददों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खुला विरोध करने वाले सत्यपाल मलिक के विरूद्घ CBI ने अदालत में चार्जशीट दायर की है। इस बीच सत्यपाल मलिक के समर्थन में जोरदार आवाज उठने लगी है। लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि यह सरकार का कैसा न्याय है? जिस व्यक्ति ने खुद ही भ्रष्टïाचार को उजागर किया था उसी व्यक्ति के विरूद्घ चार्जशीट दाखिल करना तो सरासर अन्याय है। अभी तक CBI सत्यपाल मलिक से गवाह के रूप में पूछताछ करने का दावा कर रही थी।
क्या है सत्यपाल मलिक का ताजा मामला
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक एक प्रसिद्घ राजनेता हैं। बृहस्पतिवार को अचानक खबर आई कि CBI ने जम्मू कश्मीर में हुए भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में सत्यपाल मलिक समेत 6 लोगों के विरूद्घ चार्जशीट अदालत में दायर की है। इसी खबर के साथ सत्यपाल मलिक का एक ट्वीट भी सामने आया। सोशल मीडिया X पर सत्यपाल मलिक ने एक तस्वीर पोस्ट करते हुए ट्वीट किया। X पर की गई पोस्ट में सत्यपाल मलिक अस्पताल के बेड पर नजर आ रहे हैं। उन्होंने लिखा, "मेरे बहुत से शुभचिंतकों के फोन आ रहे हैं जिन्हें उठाने में मैं असमर्थ हूं। अभी मेरी हालत बहुत खराब है। मैं फिलहाल अस्पताल में भर्ती हूं और किसी से भी बात करने की हालत में नहीं हूं।"
यह पोस्ट ठीक उस समय आई जब CBI ने किरू जलविद्युत परियोजना में 2,200 करोड़ रुपये के सिविल कार्यों के ठेके में कथित भ्रष्टाचार के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और पांच अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। एजेंसी ने तीन साल की जांच के बाद मलिक और पांच अन्य लोगों को आरोपी बनाते हुए विशेष अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया।
एक साल पहले CBI ने सत्यपाल मलिक के घर पर छापा मारा था।
एक साल पहले CBI ने सत्यपाल मलिक और अन्य लोगों के परिसरों पर छापेमारी की थी।CBI ने 2022 में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद एक बयान में कहा था कि यह मामला 2019 में ‘किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर’ (एचईपी) परियोजना के सिविल कार्यों के लगभग 2,200 करोड़ रुपये के ठेके को एक निजी कंपनी को देने में कथित गड़बड़ी से संबंधित है। मलिक 23 अगस्त, 2018 से 30 अक्टूबर, 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे थे। मलिक ने दावा किया था कि उन्हें परियोजना से संबंधित एक फाइल सहित दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी।
CBI द्वारा पिछले वर्ष छापेमारी किये जाने के बाद मलिक ने उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया था मलिक ने कहा था कि जिन लोगों के बारे में उन्होंने शिकायत की थी और जो भ्रष्टाचार में शामिल थे, उनकी जांच करने के बजाय सीबीआई ने उनके आवास पर छापा मारा। पूर्व राज्यपाल ने पोस्ट में कहा था, “उन्हें (सीबीआई अधिकारियों को) चार से पांच कुर्ते और पायजामा के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। तानाशाह सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर मुझे डराने की कोशिश कर रहा है। मैं एक किसान का बेटा हूं, मैं न तो डरूंगा और न ही झुकूंगा।”
सत्यपाल मलिक के साथ हो रहा है अन्याय
इस दौरान पूरे देश से सत्यपाल मलिक के पक्ष में आवाज उठाई जा रही है। अनेक नागरिक मुखर होकर बोल रहे हैं कि यह तो सत्यपाल मलिक के साथ अन्याय हो रहा है। लोगों का कहना है कि सत्यपाल मलिक ने तो खुद ही घोषणा की थी कि उन्हें टैण्डर पास करने के लिए 300 करोड़ रूपए तक की रिश्वत ऑफर की गई थी। जिस मामले का पर्दाफाश सत्यपाल मलिक ने खुद ही किया था भला उस मामले में सत्यपाल मलिक दोषी कैसे हो सकते हैं? इस दौरान गूगल पर सत्यपाल मलिक को खूब सर्च किया जा रहा है।
कौन हैं सत्यपाल मलिक, क्यों हो रही है चर्चा?
आपको सत्यपाल मलिक का पूरा परिचय बता देते हैं। सत्यपाल मलिक एक प्रखर राजनेता हैं। सत्यपाल मलिक की उम्र 78 वर्ष की है। सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1968-69 में उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से छात्र नेता के तौर पर की थी। इसके बाद स्व.----चौधरी चरण सिंह से निकटता की वजह से उन्होंने 1974 में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और बागपत से विधानसभा का चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। बाद में चरण सिंह के साथ ही लोक दल में शामिल हो गए। उन्हें चरण सिंह ने पार्टी का महासचिव बनाया 1980 में मलिक लोक दल की ओर से राज्यसभा पहुंचे। वहां भी ज्यादा देर नहीं रुके साल 1984 में मलिक कांग्रेस की रथ पर सवार होकर 1986 में एक बार फिर राज्यसभा पहुंचे।
लेकिन राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान बोफोर्स घोटाले के बाद 1987 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल में मलिक शामिल हो गए। 1989 में वो जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ लोकसभा से चुनाव जीतकर मलिक ने संसदीय मामलों और पर्यटन के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। साल 2004 में मलिक अटल बिहारी के नेतृत्व वाली भाजपा में शामिल हो गए हालांकि लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में मलिक ने बागपत से रालोद प्रमुख अजीत सिंह से हार का सामना किया। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान मलिक को भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विचार करने वाली संसदीय टीम का प्रमुख नियुक्त किया गया। हालांकि मलिक के इस पैनल ने विधेयक के खिलाफ अपनी राय दी और जिसके बाद सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
बीजेपी में कई वरिष्ठ पदों पर काम करने के बाद मोदी सरकार ने अक्टूबर 2017 में सत्यपाल मलिक को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया। करीब एक साल तक बिहार में काम करने के बाद उनको अगस्त 2018 में जम्मू-कश्मीर राज्यपाल बनाकर भेज दिया गया। उनके जम्मू-कश्मीर कार्यकाल के दौरान ही मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया था।
सत्यपाल मलिक को नवंबर 2019 में कश्मीर से हटाकर गोवा और फिर मेघालय का राज्यपाल बना दिया गया। बार-बार बदले जाने से सरकार के इन फैसलों के बाद मलिक “परेशान”हो गए थे । उनके राजनीतिक सहयोगियों का कहना है कि मलिक हमेशा से ही मुखर रहे हैं। यहां तक कि एक सक्रिय राजनीतिक के रूप में भी उन्होंने इसी तरह काम किया है।
सत्यपाल मलिक सरकार के खिलाफ खूब बोलते हैं
बिहार के राज्यपाल के रूप में, जिस पद पर मलिक ने 2017 में कार्यभार संभाला था, उस समय उन्होंने राज्य के सभी राजनेताओं पर बीएड कॉलेजों के मालिक होने का आरोप लगाया था। उस समय बिहार में बीजेपी-जदयू गठबंधन का शासन था। नवंबर 2018 में जब मलिक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे, तब विधानसभा भंग करते हुए मलिक ने कहा था कि अगर वह दिल्ली की ओर देखते तो उन्हें सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली सरकार स्थापित करनी पड़ती और इतिहास उन्हें एक “बेईमान आदमी” के रूप में याद रखता। मेघालय के राज्यपाल रहते हुए मलिक ने कश्मीर जलविद्युत परियोजना में भ्रष्टाचार का दावा किया था और इसके बाद उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार पुलवामा हमले में जवाबदेही तय करने में विफल रही है।
कश्मीर में आतंकियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बीच तत्कालीन मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि उनके कार्यकाल में ऐसी घटनाएं कभी नहीं हुई थीं। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आरएसएस के एक पदाधिकारी पर का आरोप लगाया था। मलिक ने कहा था, “जम्मू-कश्मीर में मेरे सामने दो फाइलें आईं। उनमें से एक अंबानी से संबंधित थी, दूसरी आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से संबंधित थी।
सचिवों में से एक ने मुझे बताया कि ये धोखाधड़ी वाली फाइलें हैं, लेकिन उसने यह भी कहा कि आप दोनों सौदों में से प्रत्येक में 150 करोड़ रुपये प्राप्त कर सकते हैं। मैंने यह कहते हुए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, ‘मैं पांच कुर्ते लेकर आया हूं और उन्हीं के साथ जाऊंगा।” मलिक के इस बयान के बाद जब बड़ा विवाद खड़ा हुआ तो जम्मू-कश्मीर के मौजूदा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। सीबीआई ने इसके बाद दो एफआईआर दर्ज की और कई जगहों पर छापेमारी की। जिसके बाद मलिक समेत कई लोगों से पूछताछ की गई।
किसानों के साथ खुलकर खड़े हुए सत्यपाल मलिक
फरवरी 2021 के बाद सत्यपाल मलिक खुलकर केंद्र की आलोचना करने लगे थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने नवंबर 2020 से चल रहे कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके के खिलाफ बात की। मलिक ने कहा, “किसानों को अपमानित करके वापस नहीं भेजा जा सकता। आप उन्हें अपमानित करके विरोध प्रदर्शनों से वापस नहीं भेज सकते। आपको उनसे बातचीत करनी चाहिए।” इस इंटरव्यू के एक महीने बाद मलिक ने बागपत में एक सभा में सार्वजनिक रूप से यह मुद्दा उठाया और कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की तरह सिखों की ओर से भी प्रतिक्रिया हो सकती है।
नवंबर 2021 में जयपुर में ‘ग्लोबल जाट समिट’ को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा, “देश ने कभी इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं देखा जिसमें 600 लोग शहीद हो गए हों। यहां तक कि अगर कोई जानवर भी मर जाता है तो दिल्ली के नेता शोक संदेश जारी करते हैं। लेकिन 600 किसानों की मौत पर कोई प्रस्ताव भी पारित नहीं किया गया।”इस प्रकार हमेशा सच को सच कहने वाले सत्यपाल मलिक बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। सत्यपाल मलिक के तमाम समर्थक उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना कर रहे हैं। Satyapal Malik