बिहार चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आधार बना 12वां दस्तावेज
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 08:13 PM
बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल करने की इजाजत दे दी है जिससे लाखों मतदाताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसका मतलब है कि यह दस्तावेज सिर्फ अन्य प्रमाण पत्रों की अनुपस्थिति में ही काम आएगा और चुनाव आयोग को इसकी सत्यता की जांच करने का पूरा अधिकार होगा। Bihar Elections 2025
क्या है मामला?
चुनाव आयोग ने SIR के तहत राज्य के मतदाताओं से नागरिकता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज जमा करने को कहा था। इसके लिए आयोग ने 11 दस्तावेजों की सूची जारी की थी, जिसमें पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि शामिल हैं। लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने शिकायत की कि उनके पास ये दस्तावेज नहीं हैं और इस वजह से उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता लेकिन मतदाता पहचान के संदर्भ में 12वें दस्तावेज के रूप में इसकी अनुमति दी जा सकती है। चुनाव आयोग यदि चाहे तो इसकी जांच कर सकता है।” इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलेगी जिनके पास बाकी 11 दस्तावेज नहीं हैं।
चुनाव आयोग की 11 दस्तावेजों की सूची
केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम में काम करने वालों का पहचान पत्र।
1 जुलाई 1987 से पहले जारी सरकारी या बैंक/LIC के दस्तावेज।
सक्षम प्राधिकारी से जारी जन्म प्रमाणपत्र।
पासपोर्ट।
मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रमाणपत्र।
स्थायी आवासीय प्रमाणपत्र।
वन अधिकार प्रमाणपत्र।
OBC/SC/ST जाति प्रमाणपत्र।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध)।
पारिवारिक रजिस्टर (स्थानीय निकाय द्वारा जारी)।
सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र।
अब आधार कार्ड को इस सूची में 12वें विकल्प के रूप में जोड़ा गया है।
बिहार में लाखों ऐसे मतदाता हैं जिनके पास निर्धारित दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में आधार को स्वीकार करना न सिर्फ प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को वोट देने से वंचित होने से भी रोकेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ है नागरिकता साबित करने के लिए आधार काफी नहीं है लेकिन पहचान के वैकल्पिक दस्तावेज के तौर पर इसे स्वीकार किया जा सकता है। Bihar Elections 2025