मोदी सरकार के साढ़े सात साल: अब देश के सामने ये है सबसे बड़ा सवाल
PM Modi
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:37 AM
30 नवंबर को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के ढाई साल पूरे हो जाएंगे। मोदी 71 वर्ष के हो चुके हैं और 2024 में जब वह तीसरा लोकसभा चुनाव लड़ रहे होंगे तो, उनकी उम्र लगभग 74 साल होगी।
सबके मन में एक ही सवाल
राजनीति में रुचि रखने वाले से लेकर आम आदमी तक में यह जिज्ञासा है कि आखिर, मोदी के बाद क्या होगा बीजेपी का भविष्य?
राजीव गांधी के बाद नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जिनकी पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त था। अभी भी, राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के सर्वे यही बताते हैं कि लोकप्रियता के मामले देश का कोई भी नेता मोदी के आसपास भी नहीं है।
राजनीति में ऐसा भी होता हैराजनीति संभावनाओं का खेल है। यहां ऐसा व्यक्ति अचानक प्रधानमंत्री बन जाता है जिसका नाम देश के अधिकांश राज्यों के लोगों ने पहली बार सुना था। जी हां, आपने सही समझा... एचडी देवगौड़ा।
हालांकि, यह तुलना सही नहीं कही जाएगी क्योंकि तब और अब के राजनीतिक हालातों में जमीन-आसमान का फर्क है। नब्बे के दशक में कांग्रेस समेत कोई भी राजनीतिक दल स्पष्ट बहुमत पाने की स्थिति में नहीं था। जबकि, पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीजेपी को लगातार स्पष्ट बहुमत मिला है। साथ ही, 12 राज्यों के मुख्यमंत्री बीजेपी से हैं।
ये बन सकते हैं मोदी का विकल्प
तो क्या ये मान लेना चाहिए कि मोदी या बीजेपी को टक्कर देने वाला अब कोई नहीं बचा। ऐसा नहीं कहा जा सकता। बीजेपी में ही उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मोदी का उत्तराधिकारी माना जा रहा है।
योगी के अलावा अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, जगनमोहन, केसीआर और स्टालिन जैसे नेता कभी भी मोदी और बीजपी के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
किसमें है सबसे ज्यादा संभावना
हालांकि, इन छह नेताओं की अगर तुलना की जाए तो अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी इस रेस में सबसे आगे दिखाई देते हैं। आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन न सिर्फ युवा हैं, बल्कि अपनी प्रशासनिक क्षमता और लोकप्रिय नीतियों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाने में सफल रहे हैं। यही बात तमिलानाडू के सीएम स्टालिन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के बारे में भी कही जा सकती है।
इन तीनों नेताओं की लोकप्रियता और राजनीतिक समझ पर किसी को संदेह नहीं हो सकता। लेकिन, राजनीति नंबर का खेल है। हिंदी भाषी राज्यों में इनका लोकप्रिय न होना ही इनकी सबसे बड़ी चुनौती है। जबकि, यही बात ममता बनर्जी और केजरीवाल के पक्ष में है।
इन दो नेताओं से है सर्वाधिक उम्मीद
यूपी-बिहार के लोग बड़ी संख्या में दिल्ली और बंगाल में बसे हुए हैं। साथ ही, केजरीवाल और ममता बनर्जी ने सीधी टक्कर में बीजेपी को मात दी है। केजरीवाल ने 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बुरी तरह पराजित किया। इसी तरह ममता बनर्जी ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को धुल चटा दी।
मोदी की तरह ममता बनर्जी और केजरीवाल अपने राज्यों में बेहद लोकप्रिय हैं। दोनों की लोकप्रियता का कारण उनकी लोकलुभावन नीतियां हैं। मोदी ने भी राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले गुजरात मॉडल को जमकर प्रचारित किया था।
कांग्रेस का क्या होगा
क्षेत्रीय पार्टियां या नेता कितने ही लोकप्रिय क्यों न हो जाएं, राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव सीमित ही रहा है। लालू यादव और मुलायम सिंह यादव इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। भारतीय राजनीति में मोदी के अलावा केवल तीन ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। इनमें मोरारजी देसाई, वीपी सिंह और देवगौड़ा शामिल हैं।
इनमें से कोई भी फुल टाइम पीएम नहीं रहा। न ही किसी की भी पार्टी को लोकसभा में कभी भी स्पष्ट बहुमत मिल पाया। इन तीन के विपरीत नरेंद्र मोदी ऐसे दल से आते हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पॉलिटिकल पार्टी है। यही बात बीजेपी और कांग्रेस को खास बना देती है।
आजादी के बाद सबसे खराब प्रदर्शन करने के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को लगभग 20% मतदाताओं ने वोट किया था, जबकि बीजेपी को 37% से कुछ ज्यादा वोट मिले थे।
इस पार्टी में है उलटफेर करने की ताकत
यही वजह है कि नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी हमेशा ही कांग्रेस को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। बीजेपी जानती है कि कांग्रेस अकेली ऐसी पार्टी जो कभी भी वापसी कर सकती है। कांग्रेस न सिर्फ देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल है बल्कि, देश के हर कोने में इसके समर्थक मौजूद हैं।
बीजेपी की कोई भी बड़ी गलती और कांग्रेस की कोई सटीक रणनीति कभी भी राष्ट्रीय राजनीति का रुख बदल सकती है। केजरीवाल, ममता बनर्जी सहित अन्य क्षेत्रीय नेता अपने राज्य, किसी संप्रदाय विशेष या वर्ग में लोकप्रिय हो सकते हैं लेकिन, इनमें कांग्रेस या बीजेपी जैसी राष्ट्रीय स्वीकार्यता का अभाव है।
इन्हें चाहिए बस एक मजबूत नेता
2024 के लोकसभा चुनाव में अभी ढाई साल से ज्यादा का वक्त है। पिछले दो लोकसभा चुनाव में जहां-जहां बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर रही है वहां 92% सीटों पर बीजेपी को जीत मिली है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि फिलहाल, कांग्रेस की कोई संभावना नहीं दिखती।
कांग्रेस के वर्तमान नेता भले ही उम्मीद जगा पाने में विफल रहे हैं, लेकिन इससे कांग्रेस पार्टी की क्षमता को कम करके नहीं आंका जा सकता। मोदी के जैसा एक सही नेता मिलते ही कांग्रस किसी भी पार्टी या नेता की लहर को हवा कर सकती है। इस बात को कोई और समझे न समझे, बीजेपी अच्छी तरह से समझती है।