
पहले शशि थरूर(Shashi Tharoor) ने भारत के तटस्थ रुख की आलोचना करते हुए रूस की निंदा करने की बात कही थी। उनका तर्क था कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन और यूक्रेन की संप्रभुता पर हमला होने के कारण भारत को रूस की आलोचना करनी चाहिए थी। लेकिन अब रायसीना डायलॉग में थरूर ने भारत की स्थिति का समर्थन करते हुए कहा कि भारत दोनों देशों के साथ बातचीत कर सकता है और शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है।
थरूर(Shashi Tharoor) ने कहा कि भारत के दृष्टिकोण ने उसे यूक्रेन और रूस दोनों के साथ जुड़ने का अवसर दिया है, जिससे वह इस युद्ध में एक संभावित मध्यस्थ बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के साथ बातचीत करने में सक्षम हैं, जिससे शांति स्थापित करने के अवसर बन सकते हैं।
थरूर(Shashi Tharoor) ने यह भी कहा कि भारत अपनी खास स्थिति का उपयोग करके शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। अगर रूस और यूक्रेन के बीच कोई समझौता होता है, तो भारत शांति सैनिकों को भेजने के लिए तैयार हो सकता है, खासकर जब रूस ने नाटो देशों के यूरोपीय शांति सैनिकों को अस्वीकार कर दिया है।
थरूर(Shashi Tharoor) ने यह स्पष्ट किया कि विपक्षी नेता के तौर पर वह सरकार की ओर से नहीं बोल सकते, लेकिन उन्होंने भारत के शांति स्थापना के लंबे इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 49 से ज्यादा मिशनों में भाग लिया है और अगर जरूरत पड़ी, तो वह वैश्विक स्थिरता में योगदान देने के लिए तैयार रहेगा।Shashi Tharoor: