संविधान बनाम मनुस्मृति: थरूर के बयान से कांग्रेस में खींची नई लकीर?
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:38 AM
Shashi Tharoor : कांग्रेस सांसद शशि थरूर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिया गया ताजा बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। मनुस्मृति बनाम संविधान की बहस के बीच थरूर ने कहा है कि "RSS और बीजेपी अब पहले जैसे नहीं रहे। वे बदल चुके हैं।" उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल BJP व RSS पर संविधान से छेड़छाड़ के आरोप लगा रहे हैं।
"अब RSS पहले से बदल चुका है"- थरूर
एक कार्यक्रम के दौरान थरूर ने कहा, "ऐतिहासिक रूप से ये बात सही है कि जब संविधान बना था, तब कुछ लोगों ने उसमें मनुस्मृति का ज़िक्र न होने को आलोचना की थी। गोलवलकर जी ने इसे एक कमी माना था। लेकिन अब मुझे लगता है कि RSS उन पुराने विचारों से आगे बढ़ चुका है। आज वे क्या सोचते हैं, ये वही बेहतर बता सकते हैं।" थरूर का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने RSS पर सीधा हमला बोलते हुए कहा था कि, "RSS और BJP को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए। वे बहुजनों और गरीबों से उनके अधिकार छीनकर उन्हें फिर गुलाम बनाना चाहते हैं। लेकिन हम संविधान की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर खड़े हैं।"
संविधान की प्रस्तावना को लेकर बढ़ा विवाद
इस विवाद की शुरुआत RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबले के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने कहा कि 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों को 'जबरन' जोड़ा गया था। होसबले ने इन्हें हटाने की वकालत की, जिसके बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। राहुल गांधी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "संविधान समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है। ये बातें RSS और BJP को चुभती हैं। लेकिन हम कभी भी संविधान की ताकत को उनसे छीनने नहीं देंगे।"
कांग्रेस में मतभेद या रणनीति का हिस्सा?
थरूर के बयान को कुछ राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस की आंतरिक रणनीति में विविधता के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी लाइन से अलग नरम रुख भी मान रहे हैं। हालांकि, थरूर ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वह सिर्फ अतीत और वर्तमान के फर्क की ओर इशारा कर रहे थे यह नहीं कि वह संघ के विचारों से सहमत हैं।