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National News: थरूर की यह टिप्पणी उन विवादों के बीच आई है, जिनमें यह मांग की गई कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाया जाए।

National News: 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर चल रही बहस में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार (2 जून) को यह सवाल उठाया कि क्या हर सार्वजनिक कार्यक्रम में इस राष्ट्रगीत को पूरा गाया जाना ज़रूरी है। ऐसी शर्त को दर्शकों के लिए "अनावश्यक और बोझिल" बताते हुए थरूर ने कहा कि 'वंदे मातरम' के प्रति सम्मान को, लेकिन हर मौके पर इसके पूरे गायन को अनिवार्य बनाने के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
थरूर की यह टिप्पणी उन विवादों के बीच आई है, जिनमें यह मांग की गई कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाया जाए।
'हर कोई 'वंदे मातरम' का सम्मान करता'
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हालांकि हर कोई 'वंदे मातरम' का सम्मान करता है, लेकिन हर कार्यक्रम में पूरे गीत को गाने की अनिवार्यता को सही ठहराना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है और जब इसे गाया जाता है, तो हम सम्मान में खड़े हो जाते हैं। इसका पहला पद, या शुरू के दो-एक पद, ज़्यादातर लोगों को ज़ुबानी याद होते हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि लंबे समय से यह परंपरा रही है कि किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार 'वंदे मातरम' गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान अलग से—अक्सर कार्यक्रम के अंत में—गाया जाता है। उन्होंने कहा, "अब वे चाहते हैं कि हर कार्यक्रम की शुरुआत में और फिर अंत में भी, इसके सभी पांचों पद गाए जाएं। मुझे लगता है कि यह एक अनावश्यक थोपा हुआ नियम है।"
'कानून नहीं परंपरा का मामला'
थरूर ने बताया कि जहां एक ओर केरल सरकार का कहना है कि इसका पूरा संस्करण गाना वैकल्पिक है, वहीं गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की राय कुछ अलग लगती है। उन्होंने कहा, "आखिरकार इस पर कोई फ़ैसला लेना पड़ सकता है, क्योंकि संसद द्वारा पारित ऐसा कोई कानून नहीं है जो इसे अनिवार्य बनाता हो। यह ज़्यादातर एक परंपरा का मामला है।"
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है, थरूर ने कहा, "हम सभी 'वंदे मातरम' का सम्मान करते हैं। मैं खुशी-खुशी इसे आपके लिए गा सकता हूं।"
नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में हुए एक किताब लॉन्च कार्यक्रम को याद करते हुए थरूर ने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत और आखिर, दोनों ही समय पूरा गाना बजाया गया था। उन्होंने कहा, "दर्शकों के लिए, एक अपेक्षाकृत अनजान और लंबा गाना, वह भी दो बार, खड़े होकर सुनना एक मुश्किल काम बन गया था।"
इस विवाद को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए, उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका समाधान आपसी सहमति से हो जाएगा। उन्होंने कहा, "मैं यह तो समझ सकता हूं कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री से जुड़े औपचारिक मौकों पर इसे एक बार गाया जाए। लेकिन, एक छोटे से कार्यक्रम के दौरान पूरे गीत को दो बार गाना मेरी समझ से बाहर है। मुझे इसका कोई तर्क नज़र नहीं आता, और न ही यह कोई बहुत कुशल तरीका है।"
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