राज्यसभा में बढ़ी NDA की ताकत, 140 के पार पहुंचा आंकड़ा
भारत की सत्ता में काबिज भाजपा के लिए वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव भले ही 2014 और 2019 जैसी ऐतिहासिक ऊंचाई लेकर नहीं आया, लेकिन 240 सीटों के परिणाम ने देश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी।

Rajya Sabha : भारत की सत्ता में काबिज भाजपा के लिए वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव भले ही 2014 और 2019 जैसी ऐतिहासिक ऊंचाई लेकर नहीं आया, लेकिन 240 सीटों के परिणाम ने देश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी। सवाल उठने लगे कि क्या भाजपा अब पहले जैसी निर्णायक और आत्मविश्वास से भरी सरकार चला पाएगी, या फिर उसे गठबंधन की मजबूरियों के बीच संतुलन साधना पड़ेगा। विपक्ष ने इसे भाजपा की कमजोरी के तौर पर पेश किया, तो राजनीतिक विश्लेषकों ने भी सरकार के भविष्य पर संशय जताया। लेकिन भाजपा ने जल्द ही यह साबित करने की कोशिश शुरू कर दी कि उसका राजनीतिक प्रभाव सिर्फ लोकसभा की संख्या तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों में मिली जीत ने यह साफ कर दिया कि पार्टी अब भी चुनावी जमीन पर बेहद मजबूत है और एनडीए का कुनबा सिर्फ टिकाऊ ही नहीं, बल्कि विस्तार की क्षमता भी रखता है।
राज्यसभा में भाजपा का नया रिकॉर्ड
भाजपा की इस बढ़ती ताकत का असर अब राज्यसभा में भी साफ दिखने लगा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब उच्च सदन में भाजपा का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। यह पार्टी के लिए केवल सांकेतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संसदीय राजनीति के लिहाज से एक बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है।250 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की कुल संख्या अब 141 तक पहुंच गई है। यह गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थिति है, क्योंकि इससे उच्च सदन में उसकी ताकत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो गई है। हाल में रिक्त हुई 37 सीटों पर हुए चुनाव में NDA ने 22 सीटें जीतकर अपना आंकड़ा 135 से बढ़ाकर 141 कर लिया।
ओडिशा और बिहार में मिला अतिरिक्त फायदा
भाजपा को खासतौर पर ओडिशा और बिहार में अतिरिक्त बढ़त मिली है। इन राज्यों में मिले लाभ ने राज्यसभा में पार्टी की स्थिति को और मजबूत किया है। वर्तमान में भाजपा के 101 निर्वाचित सदस्य उच्च सदन में मौजूद हैं। इसके अलावा 5 मनोनीत सदस्य भी उसके समर्थन में माने जा रहे हैं। इस तरह राज्यसभा में भाजपा समर्थक संख्या 106 तक पहुंचती है। NDA की कुल शक्ति में सहयोगी दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। भाजपा के बाद गठबंधन में एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सदस्य हैं। महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हैं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 2 सदस्य राज्यसभा में मौजूद हैं। आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के भी 2 सदस्य उच्च सदन में हैं।
अब दोनों सदनों में ज्यादा सहज होगी सरकार
राज्यसभा में NDA की बढ़ती संख्या का सीधा असर विधायी प्रक्रिया पर पड़ने वाला है। अब सत्ताधारी गठबंधन लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी पहले के मुकाबले अधिक सहज स्थिति में नजर आ रहा है। इसका मतलब यह है कि सरकार के लिए विधेयकों को पारित कराना अब अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। यद्यपि लोकसभा में भाजपा और NDA की संख्या पिछले दो कार्यकालों की तुलना में कम है, लेकिन राज्यसभा में लगातार बढ़ती ताकत इस कमी की काफी हद तक भरपाई करती दिख रही है। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले वर्षों, विशेषकर 2029 की दिशा में NDA की बड़ी बढ़त के रूप में देख रहे हैं।
विपक्ष की स्थिति अब भी कमजोर
अगर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की बात करें, तो उसकी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के पास राज्यसभा में अब 29 सीटें हैं। यह संख्या भाजपा की तुलना में काफी कम है। पूरे विपक्ष की कुल ताकत 62 सीटों तक सीमित है, जो सत्ता पक्ष के मुकाबले काफी पीछे दिखाई देती है। विपक्षी दलों में भी कई पार्टियों को झटका लगा है। द्रमुक (DMK), जिसे विपक्ष का अहम स्तंभ माना जाता है, उसके राज्यसभा सदस्यों की संख्या घटकर 8 रह गई है, जबकि पहले यह 10 थी। इसी तरह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ताकत भी कम हुई है और उसके सांसदों की संख्या 5 से घटकर 3 रह गई है। Rajya Sabha
Rajya Sabha : भारत की सत्ता में काबिज भाजपा के लिए वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव भले ही 2014 और 2019 जैसी ऐतिहासिक ऊंचाई लेकर नहीं आया, लेकिन 240 सीटों के परिणाम ने देश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी। सवाल उठने लगे कि क्या भाजपा अब पहले जैसी निर्णायक और आत्मविश्वास से भरी सरकार चला पाएगी, या फिर उसे गठबंधन की मजबूरियों के बीच संतुलन साधना पड़ेगा। विपक्ष ने इसे भाजपा की कमजोरी के तौर पर पेश किया, तो राजनीतिक विश्लेषकों ने भी सरकार के भविष्य पर संशय जताया। लेकिन भाजपा ने जल्द ही यह साबित करने की कोशिश शुरू कर दी कि उसका राजनीतिक प्रभाव सिर्फ लोकसभा की संख्या तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों में मिली जीत ने यह साफ कर दिया कि पार्टी अब भी चुनावी जमीन पर बेहद मजबूत है और एनडीए का कुनबा सिर्फ टिकाऊ ही नहीं, बल्कि विस्तार की क्षमता भी रखता है।
राज्यसभा में भाजपा का नया रिकॉर्ड
भाजपा की इस बढ़ती ताकत का असर अब राज्यसभा में भी साफ दिखने लगा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब उच्च सदन में भाजपा का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। यह पार्टी के लिए केवल सांकेतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संसदीय राजनीति के लिहाज से एक बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है।250 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की कुल संख्या अब 141 तक पहुंच गई है। यह गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थिति है, क्योंकि इससे उच्च सदन में उसकी ताकत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो गई है। हाल में रिक्त हुई 37 सीटों पर हुए चुनाव में NDA ने 22 सीटें जीतकर अपना आंकड़ा 135 से बढ़ाकर 141 कर लिया।
ओडिशा और बिहार में मिला अतिरिक्त फायदा
भाजपा को खासतौर पर ओडिशा और बिहार में अतिरिक्त बढ़त मिली है। इन राज्यों में मिले लाभ ने राज्यसभा में पार्टी की स्थिति को और मजबूत किया है। वर्तमान में भाजपा के 101 निर्वाचित सदस्य उच्च सदन में मौजूद हैं। इसके अलावा 5 मनोनीत सदस्य भी उसके समर्थन में माने जा रहे हैं। इस तरह राज्यसभा में भाजपा समर्थक संख्या 106 तक पहुंचती है। NDA की कुल शक्ति में सहयोगी दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। भाजपा के बाद गठबंधन में एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सदस्य हैं। महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हैं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 2 सदस्य राज्यसभा में मौजूद हैं। आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के भी 2 सदस्य उच्च सदन में हैं।
अब दोनों सदनों में ज्यादा सहज होगी सरकार
राज्यसभा में NDA की बढ़ती संख्या का सीधा असर विधायी प्रक्रिया पर पड़ने वाला है। अब सत्ताधारी गठबंधन लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी पहले के मुकाबले अधिक सहज स्थिति में नजर आ रहा है। इसका मतलब यह है कि सरकार के लिए विधेयकों को पारित कराना अब अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। यद्यपि लोकसभा में भाजपा और NDA की संख्या पिछले दो कार्यकालों की तुलना में कम है, लेकिन राज्यसभा में लगातार बढ़ती ताकत इस कमी की काफी हद तक भरपाई करती दिख रही है। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले वर्षों, विशेषकर 2029 की दिशा में NDA की बड़ी बढ़त के रूप में देख रहे हैं।
विपक्ष की स्थिति अब भी कमजोर
अगर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की बात करें, तो उसकी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के पास राज्यसभा में अब 29 सीटें हैं। यह संख्या भाजपा की तुलना में काफी कम है। पूरे विपक्ष की कुल ताकत 62 सीटों तक सीमित है, जो सत्ता पक्ष के मुकाबले काफी पीछे दिखाई देती है। विपक्षी दलों में भी कई पार्टियों को झटका लगा है। द्रमुक (DMK), जिसे विपक्ष का अहम स्तंभ माना जाता है, उसके राज्यसभा सदस्यों की संख्या घटकर 8 रह गई है, जबकि पहले यह 10 थी। इसी तरह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ताकत भी कम हुई है और उसके सांसदों की संख्या 5 से घटकर 3 रह गई है। Rajya Sabha












