चौंकाने वाली खबर : अलग-अलग बीमारियों से ग्रसित हैं भगवान
Shocking news: God is suffering from different diseases
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:55 AM
नई दिल्ली। जगत के पालनहार ही बीमार हो गए हैं। देश के तीन राज्यों में भगवान के बीमार होने से लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन से वंचित हो गए हैं। वैद्य और डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। चिकित्सकों ने उन्हें 14 से 16 दिन में स्वस्थ होने की बात कही है। इलाज के दौरान भगवान क्वारंटाइन यानि एकांतवास में रहेंगे।
माधव की धरती पर भगवान की तबीयत खराब
चमत्कारों की धरती मथुरा-वृंदावन में भगवान ने अपनी कई लीलाएं दिखाई हैं। आज भी यहां के मंदिर अपनी चमत्कारिक घटनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। हर साल देश दुनिया से लाखों श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन आते हैं। इस पावन धरती पर एक मंदिर है भगवान जगन्नाथ का। इस मंदिर में हर साल एक अजीब घटना होती है।
God Sick
16 दिन तक बीमार रहते हैं भगवान जगन्नाथ
अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने वाले भगवान जगन्नाथ खुद ही बीमार हो जाते हैं। यहां तक कि इस दौरान वे भक्तों को दर्शन भी नहीं देते हैं। वृंदावन के जगन्नाथ मंदिर में विराजित भगवान जगन्नाथ हर साल 16 दिन के लिए बीमार पड़ते हैं। ओडिसा के पुरी की तरह यहां भी श्री जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है, लेकिन इस यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ हर साल बीमार पड़ने की परंपरा है।
खुले में स्नान के कारण होते हैं बीमार
जगन्नाथ रथ यात्रा से 16 दिन पहले मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का देशभर की पवित्र नदियों और समुद्र जल से स्नान कराया जाता है, जिससे भगवान की तबियत खराब हो जाती है। इसके बाद भगवान विश्राम करते हैं। उन्हें औषधियां दी जाती हैं। तब कहीं जाकर 16 दिन बाद भगवान स्वस्थ होते हैं। 16 दिन बाद भगवान के स्वस्थ होने पर उनका दूध-दही और घी आदि से अभिषेक किया जाता है। फिर गौमाता भगवान जगन्नाथ के दर्शन करती हैं। इसके बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाते हैं।
लू लगने से अस्वस्थ हो गए भगवान जगन्नाथ
मध्य प्रदेश के पन्ना में लू लगने से भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए हैं। अब 15 दिनों तक उनका इलाज चलेगा। इस वजह से मंदिर के पट को बंद कर दिया गया है। मान्यताओं के मुताबिक रथ यात्रा के पहले भगवान लू लगने से बीमार पड़ जाते हैं। भगवान जगन्नाथ स्वामी को धूप में स्नान कराने की वजह से लू लगती है।
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150 सालों से निकाली जा रही है रथयात्रा
पुरी की तर्ज पर मंदिरों की नगरी पन्ना में भगवान जगन्नाथ स्वामी जी की रथयात्रा का कार्यक्रम बीते 150 सालों से आयोजित किया जाता रहा है। पन्ना में भगवान जगन्नाथ स्वामी का प्राचीन मंदिर है, जहां पर भगवान जगन्नाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा, भाई बलभद्र के साथ विराजमान हैं। भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा का कार्यक्रम बड़े धूमधाम के साथ यहां मनाने की परंपरा है। मान्यताओं के मुताबिक रथयात्रा के पहले भगवान लू लग जाने से बीमार पड़ जाते हैं।
राज परिवार की मौजूदगी में होती है स्नान यात्रा
भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर में राज परिवार की उपस्थिति में भगवान के स्नान यात्रा की रस्म अदा की जाती है। इसी के साथ ऐतिहासिक रथ यात्रा महोत्सव का आगाज भी हो जाता है। बीमार भगवान को ठीक करने के लिए भक्त प्रार्थना करते हैं। सबसे पहले मंदिर के गर्भगृह से भगवान को बाहर लाया जाता है। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ औषधीय जल से भगवान को स्नान कराया जाता है। इसी दौरान भगवान बीमार पड़ जाते हैं। उसके बाद उनकी दिनचर्या और भोजन व्यवस्था भी बदल दी जाती है।
वैद्य करते हैं इलाज
मान्यता है कि ठीक होने तक उन्हें प्रतिदिन वैद्य द्वारा दवा देने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस दौरान मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रहेंगे। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के 36 वर्ष बाद पन्ना में भी आषाढ़ शुक्ल की द्वितिया को जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकालने की शुरुआत हुई थी। इस रथ यात्रा में हजारों की भीड़ के साथ घोड़े-हाथी, ऊंट की सवारी निकलती है।
मंदिर की घंटियां बांधी, खिड़की दरवाजे भी बंद
राजस्थान के कोटा शहर के रामपुर इलाके से एक दिलचस्प मामला सामने आया है। यहां जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ बीमार हो गए हैं। उनका उपचार वैद्य कर रहे हैं। इलाज मंदिर परिसर में ही हो रहा है। इलाज के दौरान मंदिर में सिर्फ पुजारी और वैद्य को ही जाने की इजाजत है। भगवान के इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसलिए मंदिर की सभी घंटियों को बांधकर रखा गया है। खिड़कियों और दरवाजों को भी बंद कर दिया गया है।
15 दिनों तक भगवान रहेंगे क्वारंटाइन
भगवान जगन्नाथ का इलाज 15 तक चलेगा। इस कारण भगवान 15 दिनों तक मंदिरों में क्वारंटाइन रहेंगे। इलाज के कारण भक्तों को भगवान के दर्शन करने की इजाजत नहीं है। यहां तक की उनके मंदिर में प्रवेश की भी अनुमति नहीं है। मंदिर में सुबह-शाम केवल पुजारी और वैद्य को ही इलाज के लिए आने-जाने की इजाजत है।
200 किलो आम का रस पीने के कारण भगवान बीमार
दिलचस्प है कि यहां के भगवान आम का रस पीने के कारण बीमार हो गए। जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी कमलेश दुबे कहते हैं कि पूर्णिमा के दिन भगवान ने स्नान करने के बाद 200 किलो आम के रस का सेवन किया था। इस कारण उनकी तबीयत खराब हो गई है। अब वैद्य उनका इलाज कर रहे हैं। पुजारी का कहना है कि यह सब परंपरा का हिस्सा है।
108 घड़े के पानी से स्नान के बाद भगवान बीमार
ओडिशा के पुरी में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा से भगवान श्री जगन्नाथ रोगी हो जाते हैं। इस दिन से अगले 14 दिनों तक भगवान जगन्नाथ बीमार रहते हैं। 108 घड़े पानी से स्नान करने के एक दिन बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ अपने मंदिर में ही रहे, क्योंकि परंपरा के अनुसार वे बीमार पड़ जाते हैं और एक पखवाड़े तक एकांत में रहते हैं।
भगवान के भाई और बहन भी बीमार
भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ का ठीक उसी तरह से उपचार किया जाता है, जैसा किसी मनुष्य का बीमार पड़ने पर किया जाता है। 'अनासर घर' प्रवास के दौरान, दैतापति सेवक गुप्त अनुष्ठान करते हैं और वार्षिक रथ यात्रा से पहले देवताओं को फिर से जीवंत करने में मदद करते हैं। एक सेवक ने कहा कि गुप्त अनुष्ठानों में हम बड़ा ओडिया मठ द्वारा प्रदान किया गया फुलुरी तेल (फूल और जड़ी-बूटियों के अर्क के साथ तिल का तेल) लगाते हैं। भगवान भी तरोताजा दिखने के लिए पंचकर्म उपचार से गुजरते हैं।
शरीर के तापमान को कम करने के लिए दी जाती हैं दवाएं
भगवान को पहले शरीर के तापमान को कम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। फिर श्री अंग (पवित्र शरीर) के अन्य हिस्सों में हर्बल तेल से मालिश की जाती है। इस अवधि के दौरान देवताओं को सामान्य प्रसाद नहीं मिलता है। केवल फल ही चढ़ाए जाते हैं। कुछ सेवक भगवान की मालिश भी करते हैं।
मंदिर के शेर का द्वार भी बंद रहता है
'अनसारा काल' के दौरान पतितपबन का द्वार और भगवान जगन्नाथ की प्रतिनिधि छवि की सिम्हा द्वार (मंदिर के शेर का द्वार) को भी बंद कर दिया जाता है। मिश्रा ने कहा कि "रथ यात्रा से एक दिन पहले 'नबा जौबना दर्शन' (नया युवा प्रकटन) के अवसर पर भक्तों के सामने नए सिरे से उपस्थित होने के लिए भगवान बीमारी से ठीक हो जाएंगे।
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