वर्ष-2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में चौंकाने वाला फैसला
Mumbai Train Blast Case
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 03:57 AM
Mumbai Train Blast: मुंबई में वर्ष-2006 में हुई मुंबई लोकल ट्रेन ब्लॉस्ट के मामले में बेहद चौंकाने वाला फैसला आया है। पूरे 19 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट के सभी 12 आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंका दिया है। वर्ष-2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 189 लोग मारे गए थे तथा 800 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट में आरोपियों को मिली थी फांसी की सजा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबको चौंकाते हुए मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट का फैसला सुनाया है। वर्ष-2015 में मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट के आरोपियों को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने मुंबई ट्रेन ब्लॉस्ट के आरोपी कमल अंसारी, मोहम्मद शेख, एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी, नवी हुसैन खान तथा आसिफ खान समेत 17 आरोपियों को सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने अपने फैसले में पांच आरोपियों को फांसी की सजा तथा 12 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा का हकदार माना था। 19 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करने का चौंकाने वाला फैसला सुनाया है।
क्या फैसला दिया है बॉम्बे हाईकोर्ट ने
आपको बता दें कि, बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति एस. चांडक की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि "जो भी सबूत पेश किए गए थे, उनमें कोई ठोस तथ्य नहीं था" और इसी आधार पर "सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है। जनवरी 2025 में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई थी और तब से कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। येरवडा, नाशिक, अमरावती और नागपुर जेल में बंद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए लगभग सभी गवाहों के बयान अविश्वसनीय पाए गए। विशेष रूप से, जिन टैक्सी ड्राइवरों या अन्य चश्मदीदों ने आरोपियों की पहचान की थी, उनके बयानों पर कोर्ट ने सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि "ब्लास्ट के करीब 100 दिन बाद किसी आम व्यक्ति का किसी संदिग्ध को याद रखना स्वाभाविक नहीं है।" धमाकों से जुड़े जिन सबूतों की बरामदगी की बात अभियोजन ने की जैसे कि बम, हथियार, नक्शे आदि- कोर्ट ने उन्हें भी केस से असंबंधित बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब "प्रॉसिक्यूशन यह साबित ही नहीं कर सका कि धमाके में किस तरह का बम इस्तेमाल हुआ था," तब ऐसी बरामदगी का कोई महत्व नहीं रह जाता।