Srikant Tyagi Case : श्रीकांत त्यागी प्रकरण : स्क्रैप माफिया, पुलिस व राजनेताओं के गठजोड़ का मोहरा है श्रीकांत
Shrikant Tyagi Case Gets bail from High-court
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:19 AM
Noida : नोएडा। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने नोएडा के श्रीकांत त्यागी प्रकरण की लपटें कुछ ठंडी होती नजर आ रहीं हैं। सभ्य समाज की एक संभ्रांत महिला से बदतमीजी करके जेल गए श्रीकांत त्यागी के विरुद्ध छोटे-बड़े एक दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह चर्चा सर्वत्र हो रही है कि क्या यह पूरा प्रकरण मात्र एक महिला से बदसलूकी करने भर का था या कुछ ‘और’ भी है, जो सामने से दिखाई नहीं दे रहा है।
सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि नोएडा पुलिस की भूमिका इस मामले में इतनी विवादित तथा संदिग्ध क्यों रही है। गहन जांच पड़ताल के बाद पता चला है कि श्रीकांत कोई साधारण युवक या छुटभैया नेता नहीं है। दरअसल, वह नोएडा व आसपास के क्षेत्र (गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद) में सक्रिय स्क्रैप माफिया (लोहे के कबाड़ का धंधा) पुलिस व राजनेताओं के गठजोड़ का एक बड़ा मोहरा है। आरोप है कि श्रीकांत ही नोएडा के पुलिस के आला अफसरों की जेबों तक स्क्रैप माफिया की ‘मंथली’ (धंधे को सुरक्षित रखने के बदले दी जाने वाली रिश्वत) पहुंचाता था। इसी कारण उसको पुलिस का न केवल खुला संरक्षण प्राप्त था, बल्कि पुलिस के पांच-पांच जवान उसकी सुरक्षा में तैनात रहते थे।
क्या है स्क्रैप के धंधे का मायाजाल?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों स्क्रैप यानि कबाड़े के आसपास घूम रही है। पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं और बड़े बदमाश कबाड़ी बन गए हैं। इनकी देखादेखी कुछ छुटभैये भी कबाड़ के बिजनेस में घुसना चाह रहे हैं। कबाड़ को लेकर आएदिन झगड़े-फसाद होते रहते हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाले कबाड़ के लिए कई मर्डर तक हो चुके हैं। इस चक्कर में आम जनता के अरमानों का ‘कबाड़ा’ होता जा रहा है।
गौतमबुद्धनगर जिले में छोटे-बड़े 10 हजार से ज्यादा उद्योग हैं। इन उद्योगों से निकलने वाले स्क्रैप यानि कबाड़ से मोटी कमाई होती है। कई बड़े उद्योगों से तो इतना कबाड़ निकलता है कि हर महीने करोड़ों रुपये का मुनाफा कबाड़ी को हो जाता है। स्वाभाविक है कि मोटे मुनाफे के तलबगारों के बीच कड़ा कम्पटीशन रहता है। 90 के दशक से इस व्यवसाय में नेताओं और बदमाशों की एंट्री हुई। शुरू-शुरू में कबाड़ियों ने कबाड़ के ठेके प्राप्त करने के लिए नेताओं और बदमाशों से सिफारिश कराई। बदले में उन्हें पान-फूल पहुंचाने लगे। धीरे-धीरे पान-फूल की जगह ‘मंथली’ ने ले ली।
नेताओं और बदमाशों ने जब देखा कि उन्हें लाख-दो लाख की मंथली देकर कबाड़ी करोड़ों कमा रहे हैं तो वे खुद सीधे इस धंधे में उतर गए। कुछ ने सीधे अपने नाम से और कुछ ने रिश्तेदारों के नाम से फर्म बनाकर कबाड़ का धंधा शुरू कर दिया। फिलहाल एक बड़ा माफिया गिरोह इस धंधे का सरताज बना हुआ है। नोएडा कमिश्नरी पुलिस के ‘आला अफसर’ भी इस माफिया सरगना के साथ जुड़े हुए हैं। आरोप है कि श्रीकांत त्यागी इस माफिया गिरोह व पुलिस अफसर के बीच में कड़ी का काम करता था।
हराम की कमाई के लालच में स्क्रैप (कबाड़) के धंधे का कम्पटीशन इतना बढ़ गया कि इसने गैंगवार का रूप ले लिया है। इस गैंगवार में कई मर्डर तक हो चुके हैं। यह तय है कि श्रीकांत त्यागी प्रकरण अभी समाप्त होने वाला नहीं है। इसमें परत दर परत अभी कई ‘राज’ खुलने बाकी हैं। यही कारण है कि इस प्रकरण में रोज कुछ न कुछ नया हो रहा है।