भारत के शुभांशु शुक्ला का दुनिया का सबसे महंगा बीमा, हर सेकंड पर करोड़ों का जोखिम
भारत
चेतना मंच
02 Jul 2025 05:42 PM
Shubhanshu Shukla : भारत के पहले व्यावसायिक अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की 14 दिनों की इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है लेकिन जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है इस मिशन से जुड़ा बीमा जो दुनिया का सबसे महंगा जीवन और जोखिम बीमा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुभांशु शुक्ला के लिए यह बीमा 40 करोड़ से लेकर 160 करोड़ रुपए तक का हो सकता है।
अंतरिक्ष बीमा क्यों होता है इतना महंगा?
अंतरिक्ष यात्रा में जोखिम का स्तर अत्यधिक होता है लॉन्चिंग, अंतरिक्ष यान की डॉकिंग, अंतरिक्ष में जीवन और पृथ्वी पर वापसी हर चरण में मृत्यु या गंभीर चोट का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि अंतरिक्ष यात्रा का बीमा किसी भी अन्य बीमा की तुलना में कई गुना महंगा होता है। शुभांशु शुक्ला Axiom-4 मिशन के तहत नासा और स्पेसएक्स के सहयोग से अंतरिक्ष गए हैं। इस मिशन में भारत सरकार ने उनके लिए सीट खरीदी है, जिसकी कीमत करीब 60 मिलियन डॉलर (500 करोड़ रुपए) है। इसमें प्रशिक्षण, तकनीकी सेवाएं, यात्रा और बीमा की लागत शामिल है।
कितना हो सकता है बीमा?
जानकारों के अनुसार, Axiom जैसे मिशनों में एक यात्री के लिए बीमा $5 से $20 मिलियन (42–168 करोड़ रुपए) तक होता है। ऐसे बीमा प्रीमियम पर भी भारी रकम लगती है, जो कुल बीमा राशि का 10%–20% तक हो सकता है।
बीमा में क्या-क्या होता है शामिल?
मिशन के दौरान मृत्यु या गंभीर चोट।
ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटना या मिशन कैंसिलेशन पर नुकसान।
तकनीकी खराबी या मिशन देरी के चलते आर्थिक जोखिम।
बीमा अवधि: ट्रेनिंग से लेकर अंतरिक्ष से सुरक्षित वापसी तक।
कौन करता है ये बीमा?
दुनिया की कुछ ही बीमा कंपनियां अंतरिक्ष बीमा करती हैं, Lloyd’s of London, AXA XL, Munich Re, Global Aerospace, Starr Companies। बता दें कि, स्पेसफ्लाइट बीमा को दुनिया का सबसे महंगा बीमा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें, तकनीकी असफलता से जीवन का खतरा होता है, कोई रेस्क्यू ऑप्शन नहीं होता, मिशन की लागत बहुत ज्यादा होती है (सैकड़ों करोड़), जोखिम स्तर काफी ऊंचा होता है, अंतरिक्ष हादसों में बीमा का इतिहास।
Apollo 1 (1967): ट्रेनिंग में आग लगने से 3 की मौत, NASA ने फंड से मुआवजा दिया।
Challenger (1986): लॉन्च के 73 सेकंड बाद यान फटा, 7 की मौत, $1–3 मिलियन प्रति यात्री मुआवजा।
Columbia (2003): वापसी के समय शटल टूटा, कल्पना चावला समेत 7 की मौत, $2–5 मिलियन तक बीमा क्लेम।
क्या-क्या नहीं होता कवर?
जानबूझकर जोखिम लेना।
शराब या नशे की स्थिति में दुर्घटना।
मेडिकल स्थितियों को छिपाना।
आतंकवादी हमलों या युद्ध की स्थिति।
शुभांशु शुक्ला का बीमा न केवल आर्थिक दृष्टि से भारी-भरकम है, बल्कि यह उस साहसिक मिशन का प्रतीक है जिसे इंसानी क्षमता और तकनीक मिलकर तय करते हैं। भारत के लिए यह गर्व का क्षण है जब एक भारतीय नागरिक न सिर्फ अंतरिक्ष में कदम रखता है, बल्कि दुनिया के सबसे महंगे बीमा कवरेज के साथ देश की शान बढ़ाता है। Shubhanshu Shukla