
चुनाव आयोग ने इस व्यापक अभियान के संचालन के लिए राज्य में 77,895 बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को तैनात किया है। इसके अतिरिक्त, विशेष परिस्थितियों को देखते हुए 20,603 अतिरिक्त BLOs की भी नियुक्ति की गई है। इस कार्यबल के साथ करीब चार लाख वॉलंटियर्स और 1 लाख 56 हजार राजनीतिक दलों के बूथ एजेंट्स भी मिलकर इस काम में सक्रिय रूप से जुटे हैं, जो इसे प्रशासनिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनाते हैं। चुनाव आयोग ने इस पुनरीक्षण अभियान के लिए 7 करोड़ 90 लाख फॉर्म छपवाए थे, जिनमें से अब तक 98 फीसदी यानी करीब 7 करोड़ 71 लाख फॉर्म मतदाताओं तक वितरित किए जा चुके हैं। यह वितरण दर स्पष्ट करती है कि आयोग ने इस बार की रणनीति को न केवल कागज़ पर बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी सफलता से लागू किया है।
इस बीच, विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर लगातार आपत्ति जता रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले इस तरह का विशेष पुनरीक्षण, सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने की रणनीति हो सकती है। यही वजह है कि मामला अब सड़क से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। हालांकि, इन विरोधों का फिलहाल आयोग की कार्यप्रणाली पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और एसआईआर अभियान पूर्व निर्धारित समयसीमा में ही तेजी से आगे बढ़ रहा है। Bihar Voter Verification Case