Special story : कमाई लाखों, एडमीशन गरीब कोटे से, राइट टू एजुकेशन में हो रहा बड़ा खेल
Special story: Earning lakhs, admission through poor quota, big game in right to education
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 06:17 AM
Special story : निजी स्कूलों में 25 परसेंट सीटें राइट टू एजुकेशन यानी आरटीई के लिए आरक्षित होती हैं। हर स्कूल को इन पर एडमिशन लेना अनिवार्य है। इसका मकसद सामान्य बच्चों की तरह ही उन्हें भी शिक्षा का अधिकार देना है, लेकिन धरातल पर इसका उलटा ही नजारा दिखाई दे रहा है। लाखो कमाने वाले अभिभावक नकली डॉक्यूमेंट्स बनवाकर, स्कूलों और बीएसए ऑफिस में सेटिंग करके अपने बच्चों का गरीब कोटे में एडमीशन करवा रहे हैं। इसकी शिकायतें भी मिलती हैं, लेकिन पैसे ले-देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। हाल ही में नोएडा से लेकर कानपुर तक इसकी शिकायतें आईं, पर कोई एक्शन देखने को नहीं मिला।
Special story :
हर शहर में आ रही शिकायतें
दरअसल हर अधिकतर शहरों के स्कूलों में एडमीशन के फ्रॉड की कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। दावा है कि कई परिवार फ्री शिक्षा के लिए नकली कागजात दिखाकर बच्चों का एडमिशन करा रहे हैं। दरअसल, सरकार के राइट टू एजुकेशन कानून के तहत गरीब बच्चों को शहर के महंगे प्राइवेट स्कूल में एडमिशन मिलता है और फ्री में उनकी पढ़ाई होती है। शिकायत है कि लाखों रुपये कमाने वाले लोग भी अपने बच्चों का गरीब कोटे से एडमिशन करा रहे हैं। हाल ही में आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा के कई स्कूलों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई हैं, जिसमें कहा गया कि उनके स्कूल में कुछ ऐसे लोगों के बच्चे आरटीई के तहत एडमिशन लेकर पढ़ाई कर रहे हैं, जिनके बैंक अकाउंट में अच्छी खासी रकम है। स्कूलों ने शिकायत में बताया है कि उन लोगों ने सालाना 5 से लेकर 10 लाख रुपये तक का रिटर्न फाइल कर रखा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी को अब तक ऐसे 15 अभिभावकों की शिकायत मिल चुकी है। इसी तरह की शिकायत पिछले दिनों कानपुर और संभल में भी दर्ज हुई थी, जहां पैरेंट्स अपनी शिकायत लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिले थे कि उनके बच्चों को एडमीशिन नहीं मिल रहा है, लेकिन उनके पड़ोस में रहने वाले समृद्ध परिवारों के बच्चों को आरटीई के तहत आराम से एडमीशन मिल गया है। कानपुर में तो फर्जी डाक्यूमेंट्स भी बीएसए को उपलब्ध कराए गए थे।
रिटर्न 10 लाख, बच्चा गरीब कोटे में
रिपोर्ट के मुताबिक, एक स्कूल ने शिकायत में बताया कि उनके यहां आरटीई के तहत पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता का रिटर्न 4 लाख 96 हजार रुपये है। दूसरे स्कूल ने बताया कि उनके स्कूल में आरटीई के तहत एडमिशन लेकर पढ़ाई करने वाले एक बच्चे के पिता का रिटर्न 10 लाख रुपये से ज्यादा का है। एक बच्चे के पिता के अकाउंट में एक महीने में 25-25 हजार रुपये की रकम 4 बार आती है। मतलब उनके महीने की कमाई एक लाख रुपये है। कई बार बच्चे भी स्कूल में अपने पिता की इंकम के बारे में टीचर्स को बता देते हैं। कानपुर के बीएसए सुरजीत कुमार सिंह के मुताबिक आरटीई के दाखिले को लेकर हमारे पास कई शिकायतें आई हैं। हम इनकी अपने स्तर पर जांच करवा रहे हैं। शिकायत सही होने पाए जाने पर मामला दर्ज करवाकर कठोर सजा दिलवाई जाएगी।
इस मामले में गौतमबुद्धनगर की बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कहा कि कुछ स्कूलों से शिकायत मिली है कि उनके यहां आरटीई के तहत पढ़ने वाले कई बच्चों के पेरेंट्स के बैंक अकाउंट में अच्छी खासी रकम है। उनमें से कई पैरेंट्स ने 5-10 लाख रुपये का रिटर्न फाइल किया है। स्कूलों ने शिकायत के साथ बैंक के कुछ पेपर भी दिए हैं। सभी की जांच की जा रही है।
एडमीशन कराने को गैंग एक्टिव
दरअसल, आरटीई एक्ट के तहत एडमिशन लेने की सबसे बड़ी शर्त है कि बच्चे के पिता की सालाना आय एक लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। माता-पिता को एडमिशन के वक्त बच्चे के डॉक्यूमेंट के साथ अपना इनकम सर्टिफिकेट भी दिखाना होता है। आरोप है कि लोग फेक इनकम सर्टिफिकेट बनवाकर बच्चों का एडमिशन कराते हैं। दरअसल इसके पीछे पूरा गैंग काम कर रहा है। वे पैरेंट्स के फेक डॉक्यूमेंट बनावाने के साथ ही इंकम, कास्ट सर्टिफिकेट भी बनवा देते हैं। उनकी सेंटिंग बीएसए ऑफिस में भी रहती है। वहां से लेटर जारी करवाकर स्कूलों में एडमीशन दिलाने तक का पूरा ठेका उठाया जाता है। इसके लिए वे 3 से 5 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं। शहर के प्रसिद्ध स्कूल में एडमीशन मिलने से लेकर 8वीं तक फ्री में पढ़ाई का लालच अमीरों को कागजी गरीब बना देता है। इसके लिए वे हंसी खुशी एक मुश्त कुछ लाख देकर फ्री पढ़ाई के लिए बच्चों का एडमीशन करा लेते हैं।
क्या कहता है आरटीई
आर्थिक रूप से कमजोर वि़द्यार्थियों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए भारत सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार यानी राइट टू एजूकेशन (आरटीई) दिया गया था। यह सुविधा उनके लिए लाई गई थी, जो अपने नौनिहालों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं लेकिन वे नामी स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन के बाद लॉटरी के माध्यम से नौनिहालों को उनके पसंदीदा स्कूल में एडमिशन मिलता है, जहां उन्हें प्ले ग्रुप से 8वीं तक निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। आरटीई के तहत होने वाले एडमिशन में बच्चों को पीजी या फर्स्ट में एडमिशन मिलेगा। एडमिशन के बाद इन्हें 8वीं तक निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। बच्चो की उम्र 4 से 6 साल तक होनी चाहिए।