Special Story : पुलिस और पत्रकार बनाने की खुली दुकान, खर्चा 500-3000
Open shop to make police and journalists, cost 500-3000
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 04:30 AM
- सैय्यद अबू साद
माफिया अतीक और अशरफ की हत्या फर्जी पत्रकार बनकर आए बदमाशों ने की थी। दरअसल, आजकल फर्जी पत्रकार बनने के लिए फर्जी आईकार्ड और फर्जी माइक आईडी आसानी से प्राप्त हो रही है। वहीं, पुलिसकर्मी बनने के लिए कुछ हजार की वर्दी ही काफी है।
Special Story
प्रेस रिपोर्टर बनकर आए थे हत्यारे
माफिया अतीक और अशरफ की हत्या करने के लिए हत्यारे प्रेस रिपोर्टर बनकर आए थे। आजकल यूपी सहित पूरे देश के महानगरों में इस तरह का फर्जी कारोबार खूब चल रहा है। यहां महज दो से तीन हजार खर्च कर कोई भी पुलिस की वर्दी, बैज-बिल्ले और टोपी हासिल कर सकता है। वहीं, कोई पत्रकार बनना चाहे तो मात्र 500-700 रुपये में किसी चैनल की फर्जी आईडी आसानी से बनवा सकता है। ऐसे ही किसी फर्जी मीडिया चैनल का फायदा उठाते हुए माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या के आरोपी युवक भी खुद को पत्रकार बताते हुए उनके नजदीक पहुंच गए और उनको मौत के घाट उतार दिया।
आमतौर पर पुलिस और पत्रकारों को किसी भी जगह जाने में ज्यादा रोक-टोक का सामना नहीं करना पड़ता है। पुलिस की वर्दी या हाथ में किसी चैनल की आईडी देखकर आसानी से प्रवेश मिल जाता है। इसी का नतीजा है कि इन दिनों पत्रकारों की बाढ़ सी आई है। आप जानकारी कर लीजिए, किसी भी शहर के सूचना विभाग में पंजीकृत सिर्फ 50 से 60 पत्रकारों के ही नाम दर्ज होते हैं, जबकि किसी बड़े आयोजन में आपको 200-400 से अधिक लोगों के हाथों में चैनलों की आईडी देखने को मिल जाती है।
Special Story
गली-कूंचों में चल रहे मीडिया हाउस
असल में शहरों में भी फर्जी पत्रकार बनने के लिए फर्जी आईकार्ड और फर्जी माइक आईडी आसानी से प्राप्त हो रही है। कई लोग फर्जी तरीके से टीवी चैनल गली-कूचों में चला रहे हैं और इसे कारोबार की तरह कर रहे हैं। ये लोग अपना यूट्यूब चैनल बनाकर 500 से 700 रुपये में आईकार्ड व आईडी बेच देते हैं। हेकड़ी झाड़ने के लिए एवं गाड़ी पर प्रेस का स्टीकर लगाने के लिए कोई भी इसे हासिल कर लेता है। हर बड़े शहर में महज 500 से 700 रुपये में किसी भी चैनल की माइक आईडी तैयार हो जाती है। आईडी बनवाने वालों से किसी तरह का प्रमाण नहीं लिया जाता है। तय कीमत अदा करने पर उन्हें दो दिन के भीतर आईडी थमा दी जाती है।
कमोबेश यही स्थिति पुलिस की वर्दी की भी है। इसके लिए 2 से 3 हजार रुपये अदा करने पड़ते हैं। किसी भी महानगर में कुछ टेलर ऐसे होते हैं, जो पुलिस की वर्दी सिलने का काम करते हैं। कुछ दुकानों पर पुलिस की वर्दी से जुड़ा सामान टोपी, बेल्ट, सीटी आदि मिल जाती है। यहां भी कोई प्रमाण नहीं लिया जाता है। कोई भी व्यक्ति बेखटके आसानी से पुलिस की वर्दी हासिल कर सकता है। वहीं, पुलिस के बिल्ले, बैज और स्टीकर की दुकानें सदर बाजार में हैं।
1000 का कपड़ा, 1100 रुपये सिलाई
पुलिस की वर्दी का कपड़ा बाजार में 1000 रुपये में मिल जाता है। इसकी सिलाई भी 1000 रुपये लगती है। 300 रुपये में चमड़े का बेल्ट मिल रहा है। जबकि निवाड़ वाला बेल्ट व बिल्ले इससे भी सस्ते हैं। ये महज 120 रुपये में आ जाते हैं। 120 रुपये में डोरी और सीटी मिल जाती है। 100 रुपये की टोपी बिक रही है और 500 रुपये में भूरे रंग के जूते मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेशकी खबरों से अपडेट रहने लिएचेतना मंचके साथ जुड़े रहें।देश–दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमेंफेसबुकपर लाइक करें याट्विटरपर फॉलो करें।