SPI: ‘सामाजिक प्रगति’ में झारखंड, बिहार का प्रदर्शन निहायत खराब
SPI
भारत
RP Raghuvanshi
27 Nov 2025 02:26 PM
SPI: नई दिल्ली। सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) में झारखंड और बिहार का प्रदर्शन निहायत खराब रहा। वहीं बात करें पुडुचेरी, लक्षद्वीप और गोवा की तो इनका रिकार्ड अव्वल रहा है। इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने यह रिपोर्ट तैयार करवाई है। ईएसी-पीएम के चेयरमैन विवेक देवरॉय ने मंगलवार को यह रिपोर्ट ‘सामाजिक प्रगति सूचकांक: देश के राज्य और जिले’ जारी की।
SPI
रिपोर्ट के अनुसार, आइजोल (मिजोरम), सोलन (हिमाचल प्रदेश) और शिमला (हिमाचल प्रदेश) सामाजिक प्रगति के मामले में तीन सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिले रहे हैं।
यह रिपोर्ट प्रतिस्पर्धा संस्थान और गैर-लाभकारी संगठन 'सोशल प्रोग्रेस इम्पेरेटिव' ने तैयार की है। इसके लिए एसपीआई को आधार बनाया गया है जो देश में राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर देश की सामाजिक प्रगति को मापने का पैमाना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, दीर्घावधि में सतत आर्थिक वृद्धि के लिए सामाजिक प्रगति जरूरी है। यह सूचकांक आर्थिक वृद्धि और विकास के परंपरागत उपायों का पूरक है।
रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों में पुडुचेरी का एसपीआई स्कोर सबसे अधिक 65.99 रहा। लक्षद्वीप और गोवा 65.89 और 65.53 के स्कोर के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड का एसपीआई स्कोर सबसे कम 43.95 रहा। वहीं बिहार का एसपीआई स्कोर भी 44.47 के निचले स्तर पर रहा।
इस रिपोर्ट में 36 राज्यों एवं संघ-शासित प्रदेशों और देश के 707 जिलों को सामाजिक प्रगति के विभिन्न मानकों पर उनके प्रदर्शन के आधार पर आंका जाता है।
एसपीआई में सामाजिक प्रगति के तीन क्षेत्रों...बुनियादी मानवीय जरूरतों, बेहतर जीवनशैली के आधार और अवसरों के लिहाज से राज्यों के प्रदर्शन को आंका जाता है।
मानवीय जरूरतों के मामले में किसी राज्य या जिले में पोषण और स्वास्थ्य देखभाल, जल और स्वच्छता, व्यक्तिगत सुरक्षा और रहने की स्थिति का आकलन किया जाता है।
वहीं रहन-सहन या जीवनस्तर के मामले में मूल ज्ञान, सूचना तक पहुंच, संचार, स्वास्थ्य और देखभाल और पर्यावरण की गुणवत्ता को देखा जाता है।
इसके अलावा अवसरों के मामले में व्यक्तिगत अधिकार, निजी आजादी और चयन, समावेशन और आधुनिक शिक्षा तक पहुंच की स्थिति को आंका जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आकांक्षी जिला कार्यक्रम में शामिल 112 जिलों में से सिर्फ 27 जिलों ने ही सामाजिक प्रगति सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से अधिक अंक हासिल किए हैं। इनमें से भी सिर्फ पांच जिले ही देश के शीर्ष 100 जिलों की रैंकिंग में जगह बना पाए हैं।