Srilanka Crises : श्रीलंका में हिंसा: गोटबाया मालदीव छोड़ सिंगापुर भागे, संसद की सुरक्षा में टैंक तैनात
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:20 AM
Colombo: कोलंबो। आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुके श्रीलंका ऐतिहासिक राजनीतिक संकट से भी जूझ रहा है। श्रीलंका से भागे राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे अब मालदीव छोड़कर सिंगापुर रवाना हो गये हैं। उन्हें सिंगापुर ले जाने के लिए निजी विमान मालदीव पहुंचा था। दूसरी ओर, कोलंबो में विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। इस बीच संसद भवन की सुरक्षा के लिए टैंकों की तैनाती की गई है।
गोटबाया बुधवार की देर रात मालदीव के वेलाना इंटरनेशनल हवाई अड्डे से सिंगापुर जाने की तैयारी में थे, लेकिन यहां हो रहे प्रदर्शन के डर से फ्लाइट छोड़ दी। मालदीव में रहने वाले श्रीलंकाई नागरिकों ने राजपक्षे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उन्हें वापस श्रीलंका भेजने की मांग की। राष्ट्रपति राजपक्षे के भाई और पूर्व मंत्री बासिल राजपक्षे भी अमेरिका भाग गए हैं। उधर, स्पीकर महिंद्रा यापा अभयवर्धने ने कहा कि अब तक गोटबाया का इस्तीफा नहीं मिला है।
राजपक्षे के देश छोड़ने से श्रीलंकाई नागरिकों का गुस्सा भड़क गया है। राजधानी कोलंबो की सड़कों पर प्रदर्शनकारी जमकर उत्पात मचा रहे हैं। लोगों के उग्र विरोध को देखते हुए सेना ने अपने नागरिकों के सामने हथियार नीचे कर दिए हैं। काबू करने के लिए वे सिर्फ आंसू गैस के गोले छोड़ रहे हैं या हल्का बल प्रयोग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई और 75 से ज्यादा लोग जख्मी हैं।
भले ही राजपक्षे परिवार का कोई सदस्य सत्ता में न हो, इसके बावजूद पूर्व पीएम महिंदा राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका पोडुजाना पेरमुना (एसएलपीपी) का संसद में बहुमत है। इसके चलते नया राष्ट्रपति चुनने में उसकी अहम भूमिका होगी। 225 सदस्यीय सदन मे एसएलपीपी के 116 और विपक्ष के 108 सदस्य हैं।
एसएलपीपी के कई सदस्य पूर्व मीडिया मंत्री दुल्लास अलहप्परुमा के पक्ष में हैं। राष्ट्रपति पद की दौड़ में रानिल विक्रमसिंघे, जनता विमुक्ति पेरमुना पार्टी के अनुरा कुमारा दिसानायके, दुल्लास अलहप्परुमा और नेता प्रतिपक्ष प्रेमदासा हैं।
बताया जा रहा है कि श्रीलंका में राष्ट्रपति वही बनेगा जिसे एसएलपीपी का समर्थन मिलेगा। ऐसे में महिंद्रा राजपक्षे की भूमिका अहम हो सकती है। राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद पीएम 30 दिन के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति बनेंगे। प्रधानमंत्री इस्तीफा देते हैं तो स्पीकर कार्यवाहक राष्ट्रपति बनेंगे। 30 दिन में राष्ट्रपति चुनाव कराना होगा। महिंद्रा राजपक्षे को छोड़कर संसद के बाकी सदस्य नामांकन के पात्र होंगे। महिंदा राष्ट्रपति नहीं बन सकते, क्योंकि संविधान उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बनने से रोकता है।