Stand Up Comedy : 10 साल में स्टैंडअप कॉमेडी कैसे बनी सियासी सनसनी ?
Stand Up Comedy
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 06:50 AM
Stand Up Comedy : स्टैंडअप कॉमेडी का मकसद हमेशा से हंसाना और मनोरंजन करना रहा है, लेकिन बीते एक दशक में यह मंच सिर्फ हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रहा। अब यह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा का भी माध्यम बन चुका है।
स्टैंडअप कॉमेडी हास्य से विवाद तक
भारत में स्टैंडअप कॉमेडी का सफर 2000 के दशक में टेलीविजन पर शुरू हुआ, लेकिन 2010 के बाद यह स्वतंत्र मंचों, यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक फैल गया। इस दौरान वीर दास, ज़ाकिर खान, केनी सेबेस्टियन जैसे कॉमेडियन्स ने अपनी अलग पहचान बनाई। मगर जैसे-जैसे यह कला आगे बढ़ी, इसमें राजनीतिक टिप्पणियां और सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्य भी शामिल होने लगे।
कुटाई से लेकर जेल तक विवादों में स्टैंडअप कॉमेडी
स्टैंडअप कॉमेडियन्स के लिए बीते दशक में मंच पर प्रस्तुति देना कभी-कभी खतरनाक भी साबित हुआ है। उदाहरण के लिए, मुनव्वर फारूकी को इंदौर में एक शो के दौरान कुछ लोगों ने पीट दिया और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। तन्मय भट्ट और उनके साथियों द्वारा 2015 में आयोजित एआईबी रोस्ट भी काफी विवादों में रहा। इसी तरह, कुणाल कामरा भी अपने व्यंग्यात्मक प्रदर्शन के कारण कानूनी पचड़ों में फंस चुके हैं। हाल ही में, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर एक पैरोडी गाने के कारण खार पुलिस ने उन्हें समन भेजा था।
राजनीति और स्टैंडअप कॉमेडी का मेल
राजनीति और स्टैंडअप कॉमेडी का सीधा संबंध बन चुका है। कॉमेडियन्स राजनीतिक पार्टियों, नेताओं और सरकारी नीतियों पर खुलकर व्यंग्य करने लगे हैं, जिससे उनके शो अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहे। ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ जैसे ओटीटी शो भी विवादों में रहे हैं, जिनमें समय रैना जैसे कॉमेडियन्स ने बोल्ड कंटेंट परोसा।
स्टैंडअप कॉमेडी का इतिहास
स्टैंडअप कॉमेडी का जन्म अमेरिका में 19वीं सदी में हुआ था और धीरे-धीरे यह एक मजबूत कला रूप के रूप में उभरा। 21वीं सदी में भारत में भी इसने अपनी जगह बना ली। सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के कारण स्टैंडअप कॉमेडी अब और भी व्यापक हो गई है। आज यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा का मंच भी बन गया है। Stand Up Comedy :