GST काउंसिल में कितनी है राज्यों की ताकत? यहां मिलेगा हर सवाल का जवाब
भारत
चेतना मंच
26 Aug 2025 03:37 PM
GST काउंसिल यानी एक ऐसी संस्था जो देश के हर नागरिक की जेब पर असर डालने वाले टैक्स का फैसला करती है। जी हां, भारत में कोई भी चीज कितनी सस्ती या महंगी होगी इस पर अंतिम मुहर GST काउंसिल ही लगाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि GST काउंसिल में राज्यों की क्या भूमिका होती है? क्या वे केंद्र सरकार के किसी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या सिर्फ मोहर लगाना भर उनका काम है? आइए इसके बारे में विस्तार से समझते हैं। GST Council
क्या है GST काउंसिल?
GST काउंसिल एक संवैधानिक संस्था है जिसे संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत बनाया गया। इसका मकसद था पूरे देश में एक समान टैक्स सिस्टम लागू करना जिससे राज्य और केंद्र सरकार मिलकर टैक्स से जुड़े फैसले लें। GST लागू होने से पहले हर राज्य का अपना टैक्स नियम होता था VAT, एंट्री टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स, लगान आदि। इससे कारोबारियों को भारी दिक्कत होती थी और उपभोक्ताओं को महंगाई का बोझ झेलना पड़ता था। GST काउंसिल ने इस अव्यवस्था को खत्म किया और टैक्स की एकरूपता लाई।
काउंसिल में कौन-कौन होता है?
चेयरपर्सन: केंद्र की वित्त मंत्री (फिलहाल निर्मला सीतारमण)
सदस्य: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री या टैक्स मंत्री
राज्य वित्त मंत्री (केंद्र सरकार)
CBIC चेयरमैन: स्थायी आमंत्रित
राजस्व सचिव (केंद्र सरकार): सचिव की भूमिका
दिल्ली में स्थित काउंसिल का सारा खर्च केंद्र सरकार वहन करती है।
फैसले कैसे होते हैं?
GST काउंसिल में वोटिंग का खास सिस्टम है जिसमें, केंद्र के पास 33.3% वोटिंग पावर, सभी राज्यों के पास मिलकर 66.6% पावर कोई भी प्रस्ताव तब तक पारित नहीं हो सकता जब तक कम से कम 75% सदस्य उसके पक्ष में वोट न करें। इसका मतलब न केंद्र अकेले फैसला ले सकता है न राज्य। दोनों को मिलकर ही सहमति बनानी पड़ती है।
क्या राज्य केंद्र के फैसले का विरोध कर सकते हैं?
इसका जवाब है हां कर सकते हैं और कई बार किया भी है। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि GST काउंसिल की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं। यानी राज्य चाहें तो उसे लागू करने से मना भी कर सकते हैं।
राज्य विरोध क्यों करते हैं?
1. 2025 का टैक्स स्लैब प्रस्ताव
केंद्र ने मौजूदा 4 स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) हटाकर केवल 2 स्लैब (5% और 18%) रखने का प्रस्ताव रखा। कर्नाटक और अन्य राज्यों ने विरोध किया क्योंकि उन्हें भारी राजस्व नुकसान का डर था।
2. राजस्व मुआवजा विवाद (2022)
GST लागू करते समय कहा गया था कि 5 साल तक राज्यों को नुकसान की भरपाई केंद्र करेगा। छत्तीसगढ़ और केरल जैसे राज्यों ने इसे 5 साल और बढ़ाने की मांग की लेकिन केंद्र ने इनकार कर दिया।
3. लॉटरी पर टैक्स विवाद (2019-20)
पहले राज्य सरकार की लॉटरी पर 12% और प्राइवेट लॉटरी पर 28% टैक्स लगता था। काउंसिल ने सभी पर 28% टैक्स कर दिया। केरल, पंजाब और पूर्वोत्तर राज्यों ने जोरदार विरोध किया।
4. IGST पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार
समुद्री माल ढुलाई (Ocean Freight) पर IGST लगाने का फैसला लिया गया लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध करार दिया।
5. GST लागू करने में देरी (2017)
जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने शुरू में ही GST को संघीय ढांचे के लिए खतरा बताते हुए विरोध किया था।
GST काउंसिल के फैसले क्यों अहम हैं?
GST काउंसिल केवल टैक्स दरें ही तय नहीं करती, बल्कि ये भी निर्णय लेती है कि कौन-से सामान टैक्स के दायरे से बाहर रहेंगे, छोटे व्यापारियों को कितनी छूट मिलेगी, आपदा या संकट में अतिरिक्त टैक्स लगाया जाए या नहीं, पेट्रोल-डीजल और गैस को GST में लाना है या नहीं, हर फैसला सीधे आपकी जेब पर असर डालता है। अगर टैक्स बढ़ता है तो चीजें महंगी होती हैं टैक्स घटता है तो राहत मिलती है।
12 सितंबर 2016 को GST काउंसिल की स्थापना हुई। 1 जुलाई 2017 को GST पूरे देश में लागू हुआ। इसके बाद ई-वे बिल, ई-इनवॉइसिंग, कोविड राहत टैक्स छूट जैसे कई बदलाव भी आए। GST Council