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देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि आवारा कुत्तों को हटाने का पुराना आदेश नहीं बदलेगा लेकिन अब नगर निगमों को ज्यादा जिम्मेदारी निभानी होगी।

देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि आवारा कुत्तों को हटाने का पुराना आदेश नहीं बदलेगा लेकिन अब नगर निगमों को ज्यादा जिम्मेदारी निभानी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि खुले में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और जिन कुत्तों में रैबीज या खतरनाक व्यवहार पाया जाएगा उन्हें वापस सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा। देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से सख्त कदम उठाने को कहा है। कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर नई नीति बनाने की जरूरत भी बताई है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पिछले तीन सालों के आंकड़े देखें तो साफ पता चलता है कि डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साल 2022 में देशभर में करीब 21 लाख मामले सामने आए थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 30 लाख से ज्यादा हो गई। वहीं 2024 में रिकॉर्ड 37 लाख से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए। इन आंकड़ों ने सरकार और कोर्ट दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ जनवरी 2025 में ही सवा चार लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। यहां 4 लाख 85 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए। तमिलनाडु दूसरे स्थान पर रहा जहां करीब 4 लाख 80 हजार मामले सामने आए। गुजरात तीसरे नंबर पर रहा जहां लगभग 3 लाख 93 हजार केस दर्ज किए गए। कर्नाटक और बिहार भी उन राज्यों में शामिल हैं जहां डॉग बाइट के मामले तेजी से बढ़े हैं। दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश, जिसकी आबादी सबसे ज्यादा है वहां डॉग बाइट के मामले महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कम दर्ज हुए। इससे साफ होता है कि समस्या सिर्फ बड़े राज्यों तक सीमित नहीं है बल्कि कई शहरों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण कराएं। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पकड़कर छोड़ देने से समस्या खत्म नहीं होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन कुत्तों का व्यवहार खतरनाक है या जिनमें रैबीज संक्रमण पाया जाता है उनके लिए अलग शेल्टर होम बनाए जाएं। साथ ही सार्वजनिक जगहों पर उन्हें खाना खिलाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इसके लिए राज्यों को मिलकर काम करना होगा।
डॉक्टरों के मुताबिक, आवारा कुत्तों के हमले का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को होता है। कई मामलों में बच्चे खेलते समय कुत्तों का शिकार हो जाते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो रैबीज जैसी गंभीर बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉग बाइट के बाद तुरंत अस्पताल जाना बेहद जरूरी है। घाव को साफ पानी से धोना और समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना जान बचा सकता है।
शहरों में तेजी से बढ़ता कूड़ा, खुले में फेंका जाने वाला खाना और सही तरीके से नसबंदी न होना इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। कई इलाकों में लोग रोजाना कुत्तों को खाना खिलाते हैं जिससे उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नगर निगमों की ओर से समय पर कार्रवाई न होने के कारण भी हालात बिगड़ रहे हैं। कई शहरों में डॉग कंट्रोल प्रोग्राम कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
लगातार बढ़ते डॉग बाइट मामलों ने लोगों में डर बढ़ा दिया है। कई जगहों पर लोग सुबह-शाम टहलने से भी डरने लगे हैं। माता-पिता बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार और नगर निगमों को सिर्फ आदेश देने के बजाय जमीन पर तेजी से काम करना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस समस्या पर कुछ ठोस कदम देखने को मिल सकते हैं।
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