
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट ने भी आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं पर सख़्त रुख अपनाया है। राज्य में बढ़ते कुत्तों के हमलों और आवारा पशुओं के कारण हो रही मौतों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने नगर निकायों को विशेष अभियान चलाकर इन्हें सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों से हटाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई मानवीय तरीके से हो और जानवरों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। साथ ही, जो भी व्यक्ति इस अभियान में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ नगर निगम FIR दर्ज कर सकता है। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे प्रमुख शहरों में इस अभियान को प्राथमिकता के साथ चलाने के निर्देश दिए गए हैं। Stray Dogs
यह निर्देश 11 अगस्त को हाईकोर्ट की खंडपीठ जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस रवि चिरानिया — ने स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते कुत्तों के हमलों और रेबीज से मौतों पर सख़्त रुख दिखाते हुए सभी आवारा कुत्तों को आठ सप्ताह के भीतर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। यह आदेश नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद पर भी लागू है। हाईकोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को साफ़ निर्देश दिया कि जो लोग सड़कों, कॉलोनियों या सार्वजनिक रास्तों से आवारा जानवरों को हटाने में अड़चन पैदा करेंगे, उन पर न सिर्फ FIR दर्ज की जाए, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाए। अदालत ने सरकारी कर्मचारियों को भी यह आश्वासन दिया कि वे बिना दबाव के अपना कर्तव्य निभा सकें।
कोर्ट ने नगर निकायों को यह भी निर्देश दिया कि नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जारी करें, ताकि लोग आवारा जानवरों से जुड़ी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें। इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी, जहां अभियान की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाएगी। अदालत ने दोहराया कि सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाना केवल आश्रय स्थलों या गौशालाओं में ही किया जाए, क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर यह गतिविधि न केवल सुरक्षा बल्कि सफाई व्यवस्था के लिए भी खतरा है। Stray Dogs