
Success Story : चेतना मंच की सक्सेस स्टोरी सीरिज में आपका एक बार फिर से स्वागत है। आज की इस स्टोरी में हम बात करेंगे एक ऐसे व्यक्ति की जो ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। यह शख्स मात्र आठवीं कक्षा तक ही पढ़ा लिखा है, लेकिन उसने अपनी मेहनत और काबलियत के बल पर आज 12 हजार करोड़ की कंपनी का मालिक है। इस व्यक्ति की कंपनी में बनी नमकीन और अन्य पदार्थ का देशभर के लोग स्वाद ले रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं बीकाजी (Bikaji) भुजिया की। बीकाजी भुजिया बनाने वाली कंपनी के मालिक मात्र आठवीं पास हैं और आज के वक्त में वह एक सफल बिजनेसमेन बन गए हैं। बीकाजी भुजिया के मालिक शिवरतन अग्रवाल हैं। उनकी कंपनी ब्रांड भुजिया, नमकीन, डिब्बाबंद मिठाई, पापड़ और साथ ही अन्य व्यंजन बनाती है। आज के समय में बीकाजी भारत की तीसरी सबसे बड़ी पारंपरिक स्नैक निर्माता कंपनी है। 1992 में इंडस्ट्रीयल एक्सीलेंस के लिए बीकाजी को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। बीकाजी के प्रोडक्ट विदेशों में भी भेजे जाते हैं। उनके बनाए प्रोडक्ट्स में वेस्टर्न स्नैक्स और फ्रोजेन चीजें भी शामिल हैं और देश भर में 8 लाख से ज्यादा दुकानों में आज बीकाजी के प्रोडक्ट मिलते हैं।
बीकाजी कंपनी के मालिक शिवरतन अग्रवाल हल्दीराम भुजियावाला के पौत्र हैं। बचपन से ही शिवरतन को नमकीन बनाने में गहरी रुचि थी और उन्होंने अपने दादाजी से भुजिया बनाना सीखा। शिवरतन ने केवल 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और फिर अपने फैमिली बिजनेस में शामिल हो गए।
हल्दीराम के बाद 'हल्दीराम भुजियावाला' का बिजनेस उनके बेटे मूलचंद अग्रवाल के पास चला गया। मूलचंद अग्रवाल के चार बेटे शिवकिशन अग्रवाल, मनोहर लाल अग्रवाल, मधु अग्रवाल और शिवरतन अग्रवाल थे। शिवकिशन, मनोहरलाल और मधु ने मिलकर भुजिया का एक नया ब्रांड शुरू किया और अपने दादाजी के हल्दीराम के नाम पर कारोबार शुरू किया। लेकिन चौथे बेटे शिवरतन अग्रवाल ने अपने भाईयों से अलग अपना ही कारोबार शुरू किया और बीकाजी नाम रखा।
हालांकि बीकाजी को शुरू करने के बाद शिवरतन अग्रलवा को काफी परेशानियों का सामना करना पडा। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष करते गए। आज वह 12 हजार करोड़ की कंपनी के मालिक है। शिवरतन अग्रवाल के स्वामित्व वाली बीकाजी कंपनी में आज 200 से ज्यादा प्रॉडक्ट तैयार किए जाते हैं।