एक चपरासी ने कर दिया बड़ा कमाल, अब है दो कंपनियों का मालिक
Success Story
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 07:45 PM
Success Story : कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हो और कड़ी मेहनत की जाए तो सफलता मिलना मुश्किल नहीं होता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है कभी 80 रुपये रोजाना कमाने वाले इस शख्स ने। जिसने अपनी मेहनत और लगन से खुद की किस्मत बदल ली है। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने वाले है, जो कभी एक ऑफिस में चपरासी का काम करता था। आज वह शख्स दो कंपनियों का मालिक है। आईए आपको बताते हैं दादा साहेब भगत ने जिंदगी में इतनी सफलता कैसे हासिल की।
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कहते हैं जिंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अगर ठान लिया जाए तो बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है दादा साहेब भगत ने। कभी इंफोसिस के दफ्तर में चपरासी का काम करने वाले दादा साहेब भगत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। चपरासी की नौकरी करते हुए दादा साहेब भगत ने कभी हार नहीं मानी और अपने सपनों की ओर आगे बढ़ते रहे। आज दादा साहेब भगत दो कंपनियों के मालिक है। बता दें कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दादासाहेब के इस हौंसले की तारीफ कर चुके हैं।
80 रुपये थी पहली कमाई
महाराष्ट्र के बीड में साल 1994 में जन्मे दादा साहेब भगत ने हाई स्कूल की पढ़ाई करने के बाद पुणे से आईटीआई का कोर्स पूरा किया। उस दौरान दादा साहेब को नौकरी की काफी जरूरत थी। ऐसे में उन्होंने गेस्ट हाउस में रूम सर्विस ब्वॉय के तौर पर नौकरी कर ली। इंफोसिस के गेस्ट हाउस में उनका काम लोगों को रूम सर्विस, चाय-पानी देना था। उन्हें झाड़ू-पोछा, साफ-सफाई करना पड़ता था। इसके लिए दादा साहेब भगत को 80 रुपये रोजाना मिलते थे।
रात में करते थे पढ़ाई
दादा साहेब जानते थे कि पढ़ाई ही वह हथियार है, जिसके माध्यम से वह अपनी किस्मत बदल सकते हैं। साल 2009 में दादा साहेब शहर चले आए। उन्हें इंफोसिस कंपनी में काम मिल गया। वहां चपरासी की नौकरी के लिए उन्हें 9,000 रुपये की सैलरी मिलने लगी। इंफोसिस में काम करना उनके लिए अच्छा रहा। उन्होंने देखा कि लोग कंप्यूटर में कुछ करते हैं, जिसकी वजह से वो बड़ी-बड़ी गाड़ियों से आते है। कंप्यूटर को लेकर उनकी इच्छा जागने लगी। उन्होंने वहीं से कंप्यूटर और उसकी तकनीक से जुड़ी डिटेल सीखना शुरू कर दिया। रात में ग्राफिक्स डिजाइनिंग और एनीमेशन की पढ़ाई करते थे। नौकरी के साथ-साथ C++ और Python का कोर्स भा दादा साहेब भगत ने किया।
हादसे ने बदली किस्मत
आपको बता दें कि दादा साहेब भगत एक हादसे का शिकार हो गए थे। इस कारण उन्हें नौकरी छोड़कर अपने घर वापस जाना पड़ा, जहां वह करीब 3 महीने रहे। हालांकि इस दौरान भी उनका जुनून काम नहीं हुआ और वह अपने दोस्त का लैपटॉप किराए पर लेकर टेंपलेट्स बनाने लगे। केवल इतना ही नहीं दादा साहेब ने सोशल मीडिया पर इसे बेचना भी शुरू कर दिया। इससे उन्हें इतनी ज्यादा कमाई होने लगी की वह साल 2016 में खुद की कंपनी शुरू की। जिसका नाम उन्होंने Ninthmotion रखा। बाद में उन्होंने एक और कंपनी की शुरुआत की, जिसका नाम उन्होंने DooGraphics रखा।
दादा साहेब भगत की नेट वर्थ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दादा साहेब भगत की नेटवर्थ करोड़ों में है। वहीं कंपनी के पास 40 हजार से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। इस कंपनी में ऑनलाइन ग्राफिक्स डिजाइनिंग का नया सॉफ्टवेयर बनाया जो बिल्कुल Canava जैसा है। इन्हें कई मल्टीनेशनल कंपनियों से ऑफर भी मिल चुका है। विदेश के भी क्लाइंट इस कंपनी से जुड़े हुए हैं। दादा साहेब के पास आज खुद की मेहनत से ऑडी जैसी बड़ी गाड़ी के मालिक है। Success Story