भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए नीट, तमिल भाषा, तिरुक्कुरल और सेंगोल का मुद्दा उठाया। उन्होंने चेन्नई की विकास परियोजनाओं, तमिलनाडु के रेलवे बजट, बंदरगाहों के विस्तार, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा गलियारों तथा भारत की आर्थिक वृद्धि का हवाला देकर केंद्र स

National News : भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज का हवाला दिया। तमिलनाडु में तमिल भाषा, नीट परीक्षा और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। उन्होंने तमिल भाषा और साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने से लेकर चेन्नई में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं, रेलवे और बंदरगाहों के विस्तार तक कई मुद्दे उठाए। त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तमिल संस्कृति से जुड़े प्रतीकों का विरोध करने और देश में विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि नीट परीक्षा लागू होने से तमिल भाषा पर हमला होने का दावा पूरी तरह गलत है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति को विशेष सम्मान दिया गया है। त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने तमिल भाषा की विभिन्न विशेषताओं को केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पहचान दिलाने का प्रयास किया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिल भाषा और उसकी धार्मिक-साहित्यिक विरासत का उल्लेख किए जाने की बात भी कही।
भाजपा सांसद ने तमिल साहित्य की प्रतिष्ठित रचना ‘तिरुक्कुरल’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति को तिरुक्कुरल भेंट किया था। उन्होंने इसे तमिल साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों से जोड़ा। त्रिवेदी ने विदेशों में तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की पहल का भी जिक्र किया और सिंगापुर में ऐसे केंद्र की स्थापना की बात कही। उनका कहना था कि तमिल भाषा और संस्कृति के सम्मान को लेकर केंद्र सरकार की पहल कांग्रेस के दावों से अलग तस्वीर पेश करती है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि 1967 से तमिलनाडु की सत्ता से बाहर रहने के दौरान पार्टी ने तमिल भाषा और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए ऐसे कौन-से प्रयास किए।
सुधांशु त्रिवेदी ने नए संसद भवन में पवित्र सेंगोल स्थापित किए जाने का विरोध करने के लिए भी कांग्रेस को निशाने पर लिया। सेंगोल को तमिल परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा प्रतीक बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इसका विरोध किया। उन्होंने राहुल गांधी पर देश में विभाजन पैदा करने वाली राजनीति करने का आरोप भी लगाया। ये आरोप भाजपा सांसद ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए; कांग्रेस का पक्ष इन बयानों के संदर्भ में अलग से सामने आने पर खबर में जोड़ा जा सकता है।
त्रिवेदी ने तमिलनाडु में बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र करते हुए चेन्नई में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का हवाला दिया। उन्होंने चेन्नई मेट्रो के लिए 4,900 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 3,700 करोड़ रुपये का उल्लेख किया। उन्होंने कराइकल–पेरलम रेल लाइन और चेन्नई, वीओ चिदंबरनार तथा कामराजार बंदरगाहों पर माल ढुलाई और क्रूज सुविधाओं के उन्नयन का भी जिक्र किया। त्रिवेदी के मुताबिक, ये परियोजनाएं तमिलनाडु में संपर्क व्यवस्था और व्यापारिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। रेलवे के संबंध में उन्होंने बताया कि तमिलनाडु को वर्ष 2026-27 के रेल बजट में 7,611 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत राज्य के 77 स्टेशनों को पुनर्विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया है। रेल मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी में भी 7,611 करोड़ रुपये के आवंटन और 77 चिन्हित स्टेशनों का उल्लेख है।
भाजपा सांसद ने तमिलनाडु में सागरमाला कार्यक्रम के तहत चिन्हित परियोजनाओं और बंदरगाहों के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में समुद्री व्यापार से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने चेन्नई–कामराजार–कडलूर बंदरगाह समूह का जिक्र करते हुए वर्ष 2047 तक इसकी सालाना माल संभालने की क्षमता 30 करोड़ टन करने का लक्ष्य बताया। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की जानकारी में भी इस बंदरगाह समूह के लिए 2047 तक 300 मिलियन टन सालाना माल संभालने की क्षमता का लक्ष्य दर्ज है। त्रिवेदी के अनुसार, रेल, सड़क और बंदरगाहों से जुड़ी परियोजनाएं तमिलनाडु की आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों को दर्शाती हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार की नीति का बचाव किया। उन्होंने कहा कि देश में रक्षा विनिर्माण और स्वदेशी क्षमता को बढ़ाने के लिए उत्तर भारत और दक्षिण भारत में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित करने का निर्णय लिया गया। उनके मुताबिक, उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश को रक्षा गलियारे का केंद्र बनाया गया, जबकि दक्षिण भारत में तमिलनाडु को यह परियोजना दी गई। उन्होंने इस फैसले को प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक और संतुलित नीति का उदाहरण बताया। त्रिवेदी ने कहा कि तमिलनाडु में भाजपा सत्ता में नहीं है, इसके बावजूद राज्य को रक्षा गलियारा दिया जाना सरकार के दृष्टिकोण को दिखाता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में त्रिवेदी ने यह भी कहा कि भारत पिछले डेढ़ से दो वर्षों से प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने देश की आर्थिक वृद्धि दर 7 से 7.8 प्रतिशत के बीच रहने का दावा किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक में भारत की प्रगति और डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में देश की अग्रणी स्थिति का भी उल्लेख किया। भाजपा सांसद के मुताबिक, भारत की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों के बीच राजनीतिक बहस को केवल आरोपों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तमिल भाषा और साहित्य के सम्मान, नीट परीक्षा, सेंगोल, विकास परियोजनाओं और रक्षा उत्पादन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। भाजपा ने इन विषयों के जरिए राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की। हालांकि, तमिलनाडु में इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। त्रिवेदी के बयान भाजपा का पक्ष सामने रखते हैं; राहुल गांधी और कांग्रेस की प्रतिक्रियाओं को शामिल करने से इस राजनीतिक बहस की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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