निशांत कुमार की राज्यसभा में संभावित जगह पर चर्चा तेज, कांग्रेस का तंज

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद तारिक अनवर ने इस संभावना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जद(यू) एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है और अपने हितों के लिए वह जो भी फैसला ले, उसे रोका नहीं जा सकता।

Bihar Politics
निशांत को लेकर कांग्रेस का बड़ा बयान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Mar 2026 09:02 PM
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Bihar Politics: बिहार में राज्यसभा चुनाव के दांव-पेच के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री को लेकर अटकलें अपने चरम पर हैं। निशांत कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा जोर-शोर से हो रही है, जिस पर कांग्रेस और जद(यू) दोनों पक्षों से बयान सामने आए हैं।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का बड़ा बयान

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद तारिक अनवर ने इस संभावना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जद(यू) एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है और अपने हितों के लिए वह जो भी फैसला ले, उसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ''नीतीश कुमार और उनकी लिगेसी राजनीति में आगे चले, इसके लिए शायद उनका यह फैसला होगा। मैं समझता हूं कि आने वाले समय में वो चाहते हैं कि उनकी जो लिगेसी है वो कायम रहे।''

जद(यू) ने दिखाई हरी झंडी

इस बीच, जद(यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने पर मुहर लगाते हुए कहा कि यह पार्टी के सामाजिक समूह और बिहार के आम आदमी की सदिच्छा है। उन्होंने कहा, ''निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आएं, यह जनता दल (यूनाइटेड) के समर्थकों की इच्छा है। अगर कुछ लोग इससे असंतुष्ट होते हैं तो यह उनका विषय है।'' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयानों के बाद अब यह महज कयास नहीं रह गया है और इस दिशा में एक सार्थक पहल नेतृत्व को तय करना है।

बंगाल में SIR पर भी बोले तारिक अनवर

निशांत कुमार के मुद्दे के अलावा, तारिक अनवर ने पश्चिम बंगाल में 'SIR' (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ईशा खान चौधरी के चुनाव बहिष्कार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, ''बंगाल में SIR के पर्दे के पीछे जो कुछ हो रहा है, वह गंभीर है। तृणमूल कांग्रेस के गढ़ों से पारंपरिक मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।''

राज्यसभा चुनाव का समय-सारणी

बता दें कि बिहार से राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है, जबकि चुनाव 16 मार्च को होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए इस चुनाव को माध्यम बनाते हैं। Bihar Politics

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यह गांव 'होली' से है कोसों दूर! देवी के आदेश पर 100 साल से नहीं बजी रंगों की गूंज

खजुरपदर गांव की यह अनोखी परंपरा सिर्फ एक रिवाज़ नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था है, जिसके पीछे एक भयावह इतिहास है। ग्रामीणों का मानना है कि करीब 100 साल पहले यहां होली खेली जाती थी।

Chhattisgarh Holi 2026
देवी के आदेश पर 100 साल से नहीं बजी रंगों की गूंज (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Mar 2026 07:46 PM
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Chhattisgarh Holi 100 year old story : जब पूरा देश रंगों की बौछारों, गुलाल और होलिका दहन के साथ होली के त्योहार को धूमधाम से मनाता है, तब छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का एक गांव इस उल्लास से साइकिल स्टैंड पर खड़ी गाड़ी की तरह सन्नाटे में रहता है। यहां होली नहीं एक त्योहार, बल्कि एक 'वर्जित गतिविधि' है। हम बात कर रहे हैं मैनपुर तहसील से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित खजुरपदर गांव की, जहां पिछले एक सदी से अधिक समय से देवियों के आदेश पर होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है।

100 साल पुरानी 'आस्था' और दैवीय प्रकोप की कहानी

खजुरपदर गांव की यह अनोखी परंपरा सिर्फ एक रिवाज़ नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था है, जिसके पीछे एक भयावह इतिहास है। ग्रामीणों का मानना है कि करीब 100 साल पहले यहां होली खेली जाती थी। लेकिन एक बार जब गांव ने रंग-गुलाल का त्योहार मनाया, तो ग्राम देवी 'शानपाठ देवी' और 'श्रीमाटी देवता' को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया।

देवियों के कोप से गांव में तबाही मच गई। अचानक से चेचक (Smallpox) और उल्टी-दस्त जैसी महामारी फैल गई, जिससे गांव तबाह होने के कगार पर पहुंच गया। तब गांव के पूर्वजों ने देवी माता से माफी मांगी, विशेष पूजा-अर्चना और व्रत रखे। कहा जाता है कि देवी प्रसन्न हुईं और बीमारी गायब हो गई। उसी दिन से गांव ने एक सामूहिक फैसला लिया—'अब कभी होली नहीं खेलेंगे।'

होली के दिन कैसा रहता है गांव?

होली के दिन जब बाकी दुनिया 'होली है...' के नारे लगाती है, तब खजुरपदर गांव की दिनचर्या बिल्कुल सामान्य दिनों जैसी रहती है।

  • न तो यहां होलिका दहन होता है, न ही बच्चे पिचकारी लेकर निकलते हैं।
  • गांव के 2,000 की आबादी वाले लोग अपने-अपने घरों में रहते हैं।
  • पूरा दिन शानपाठ देवी और अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और प्रार्थना में बीतता है।
  • गांव के लोग इस दिन परिवार और गांव की सुख-शांति के लिए दुआ मांगते हैं और रंग-गुलाल से पूरी तरह परहेज करते हैं।

बाहरी लोगों को भी करना पड़ता है पालन

यह परंपरा इतनी मजबूत है कि आसपास के गांवों के लोग भी इसे जानते हैं और मानते हैं। होली के दिन अगर कोई बाहरी व्यक्ति गांव से गुजरता है, तो वह चुपचाप निकल जाता है। किसी की हिम्मत नहीं होती कि वह यहां रंग लगाने की कोशिश करे।

करीब 15-20 साल पहले एक बार पड़ोसी गांव के कुछ लोगों ने इस नियम को तोड़ने की कोशिश की थी और रंग खेला दिया था। ग्रामीणों का दावा है कि इसके तुरंत बाद फिर से चेचक जैसी बीमारी का प्रकोप दिखा, जो देवी की पूजा के बाद ही शांत हो सका। इस घटना ने गांव वालों के विश्वास को और पक्का कर दिया।

क्या कहते हैं गांव के प्रतिनिधि?

इस रहस्यमयी परंपरा को लेकर जनपद सदस्य जयसिंह नागेश और सरपंच कुमारी बाई नागेश ने पुष्टि की कि यह परंपरा बुजुर्गों से सुनी हुई सच्चाई है और देवी का आदेश सर्वोपरि है। वहीं, पूर्व सरपंच येपेश्वर नागेश ने बताया कि आसपास के गांव भी इस नियम का सम्मान करते हैं। ग्रामीण धरम सिंह और पूरन प्रताप ने कहा, "अगर देवी चाहती हैं कि होली न खेली जाए, तो यही हमारे लिए सर्वोत्तम है। गांव की खुशहाली सबसे जरूरी है।" Chhattisgarh Holi 100 year old story

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बिहार से भाजपा ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों की घोषणा

नितिन नवीन भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे बिहार के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन विधायक के रूप में वे अभी सक्रिय हैं। अब राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।

BJP Rajya Sabha Candidate List
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (फाइल फोटो)
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userऋषि तिवारी
calendar03 Mar 2026 05:03 PM
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BJP Rajya Sabha Candidate List: बिहार से होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक समीकरणों में गति आ गई है। बिहार में खाली हो रहीं पांच राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने अपने दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व विधायक शिवेश कुमार ऊर्फ शिवेश राम को प्रत्याशी घोषित किया है।

कौन हैं नितिन नवीन और शिवेश राम?

नितिन नवीन भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे बिहार के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन विधायक के रूप में वे अभी सक्रिय हैं। अब राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। वहीं, दूसरे उम्मीदवार शिवेश राम अगिआंव विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके हैं। वे एक दलित नेता के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं और उन्होंने सासाराम लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा है।

NDA का पांचों सीटों पर कब्जा करने का दावा

बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिसमें वर्तमान में आरजेडी के दो, जेडीयू के दो और उपेंद्र कुशवाहा के एक सांसद शामिल हैं। विधायकों की संख्या के मद्देनजर एनडीए (NDA) को चार सीटों पर आराम से जीत मिलना तय मानी जा रही है। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। सूत्रों के मुताबिक, चार सीटों पर जीत के बाद एनडीए के पास 38 वोट बचेंगे, जिसके लिए केवल 3 वोटों की और जरूरत है। इसके बावजूद, एनडीए के नेता पांचों सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं।

क्या है विपक्ष की स्थिति?

विपक्षी महागठबंधन के पास कुल 41 विधायक हैं। हालांकि, AIMIM के पांच और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक विधायक महागठबंधन का हिस्सा नहीं माने जाते हैं। ऐसे में विपक्ष के लिए एक सीट जीतना भी मुश्किल हो सकता है। महागठबंधन की तरफ से आरजेडी (RJD) उम्मीदवार उतार सकती है।

नीतीश कुमार के बेटे को भी मिल सकता है मौका

सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू (JDU) अपने कोटे की दो सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित करेगी। चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को भी राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा को भी एनडीए की तरफ से उम्मीदवार बनाये जाने की संभावना है। BJP Rajya Sabha Candidate List

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