अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उनके अचानक चले जाने से जो राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। सुनेत्रा पवार के सामने न सिर्फ सरकार में खुद को साबित करने की चुनौती होगी।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के वरिष्ठ नेता अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और खासतौर पर एनसीपी इस वक्त गहरे शोक और राजनीतिक असमंजस के दौर से गुजर रही है। इसी बीच यह लगभग तय माना जा रहा है कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को पार्टी विधायक दल का नेता चुना जाएगा और वे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं। अजित पवार के निधन के महज तीन दिन बाद यह फैसला लिए जाने की तैयारी है। फिलहाल सुनेत्रा पवार बारामती में समर्थकों से मिलकर संवेदनाएं स्वीकार कर रही हैं। पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा हालात में वही ऐसा चेहरा हैं, जो अजित पवार की राजनीतिक विरासत को संभाल सकती हैं।
बता दें कि अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उनके अचानक चले जाने से जो राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। सुनेत्रा पवार के सामने न सिर्फ सरकार में खुद को साबित करने की चुनौती होगी, बल्कि पार्टी को एकजुट रखने की जिम्मेदारी भी होगी। हालांकि सुनेत्रा पवार सक्रिय राजनीति में नई मानी जाती हैं, लेकिन उनका जुड़ाव दो बड़े राजनीतिक परिवारों से रहा है। वे स्वयं एक राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं और विवाह के बाद पवार परिवार का हिस्सा बनीं। 2024 से पहले तक वे मुख्य रूप से सामाजिक कार्यों और जनसेवा में सक्रिय रहीं।
बता दें कि एनसीपी के भीतर इस समय नेतृत्व को लेकर कोई दूसरा सर्वमान्य नाम सामने नहीं आया। पार्टी विधायक और कार्यकर्ता किसी अन्य चेहरे को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखे। अजित पवार के दोनों बेटे पार्थ पवार और जय पवार फिलहाल राजनीति में उतने अनुभवी नहीं माने जाते, इसलिए उनके नाम पर गंभीर विचार नहीं हुआ। सुनेत्रा पवार को ऐसे वक्त पार्टी की कमान मिलने जा रही है, जब एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) के संभावित विलय को लेकर अंदरूनी मतभेद तेज हैं। पार्टी का एक धड़ा दोनों गुटों के एक होने की वकालत कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग अपनी अलग पहचान बनाए रखने के पक्ष में है।
बता दें कि महायुति सरकार में पहले से ही दो अन्य दल मजबूत स्थिति में हैं। अजित पवार ने इस गठबंधन में अपनी अलग पहचान और दबदबा कायम किया था। अब सुनेत्रा पवार के सामने यह चुनौती होगी कि वे न सिर्फ गठबंधन में अपनी जगह बनाएं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी प्रभावी भूमिका निभाएं। एनसीपी में उनके साथ छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे अनुभवी नेता मौजूद रहेंगे। हालांकि पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि शरद पवार गुट के साथ विलय की दिशा में आगे बढ़ा जाए या अलग राह अपनाई जाए।
बता दें कि बदले हालात में राज्य की राजनीति में दो अहम सवाल चर्चा में हैं। पहला, क्या शरद पवार अपनी धर्मनिरपेक्ष राजनीति की छवि से हटकर बीजेपी के साथ आने का फैसला करेंगे? दूसरा, क्या बीजेपी शरद पवार पर वैसा ही भरोसा करेगी, जैसा उसने अजित पवार पर किया था? कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार के सामने अपने पति की राजनीतिक विरासत संभालने, पार्टी को टूट से बचाने और एनसीपी की प्रासंगिकता बनाए रखने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि वे इस कठिन परीक्षा में कितनी सफल साबित होती हैं। Maharashtra Politics