सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा बड़ा फैसला, सड़कों से हटेंगे आवारा कुत्ते!
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 01:16 PM
देशभर में चर्चा का विषय बने आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट आज, शुक्रवार 22 अगस्त को अहम फैसला सुनाने जा रहा है। यह फैसला तय करेगा कि दिल्ली-NCR की सड़कों से आवारा कुत्तों को स्थायी रूप से हटाकर शेल्टर होम में रखा जाएगा या नहीं। इस मुद्दे को लेकर जहां एक ओर स्थानीय लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों को इस फैसले से झटका लग सकता है। Supreme Court
क्या है मामला?
11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए आदेश दिया था कि दिल्ली-NCR की सड़कों से आवारा कुत्तों को फौरन हटाया जाए और कम से कम 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर होम्स बनाए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि इस आदेश के पालन में कोई भी बाधा डालने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद देशभर में विरोध की लहर दौड़ गई। कई पशु प्रेमी संगठनों और एक्टिविस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट से इस आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि इससे पशु अधिकारों का हनन होगा और कई कुत्तों की जिंदगी संकट में पड़ सकती है।
14 अगस्त को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित
14 अगस्त को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय विशेष पीठ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया ने की थी। सुनवाई पूरी होने के बाद पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे अब 22 अगस्त को सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों की समस्या स्थानीय निकायों की लापरवाही और नसबंदी एवं टीकाकरण कार्यक्रमों के कमजोर क्रियान्वयन का नतीजा है।
चौंकाने वाले आंकड़े
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 2024 में पूरे देश में करीब 37.15 लाख डॉग बाइट के केस सामने आए, यानी औसतन हर दिन 10,000 लोग कुत्तों के काटने का शिकार बने। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में डॉग बाइट के चलते 305 लोगों की जान चली गई जिनमें से अधिकतर बच्चे थे।
यह फैसला सिर्फ दिल्ली-NCR ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों से जुड़ी नीतियों और पशु अधिकारों के बीच संतुलन तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्थानीय लोगों को राहत देता है या पशु प्रेमियों की चिंताओं को ध्यान में रखता है या फिर दोनों के बीच कोई संतुलित रास्ता निकालता है। Supreme Court