सुप्रीम कोर्ट के बड़े आदेश से शिक्षक नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों को लेकर तस्वीर साफ हुई है। NCTE योग्यता, TET और RTE Act के नियमों का शिक्षकों की भर्ती, नियमितीकरण और प्रमोशन पर क्या असर पड़ेगा, जानिए पूरी जानकारी।

National News : शिक्षक नियुक्तियों और शिक्षा व्यवस्था में न्यूनतम योग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए कानून और सक्षम प्राधिकरण द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता का पालन जरूरी है। विशेष रूप से प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर RTE Act की धारा 23 के तहत NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता और Teacher Eligibility Test (TET) की भूमिका को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना है। National News
सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि RTE Act लागू होने के बाद शिक्षकों की नियुक्ति में NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता का पालन किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा है कि यह व्यवस्था केवल नए शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि ऐसे पहले से नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू हो सकती है, जिन्हें अभी नियमित नहीं किया गया है और जिनके लिए निर्धारित योग्यता हासिल करना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि NCTE ने RTE Act की धारा 23 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित की है। 23 अगस्त 2010 की NCTE अधिसूचना के बाद संबंधित शिक्षकों के लिए TET को भी न्यूनतम योग्यता व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया। National News
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का असर केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं है। न्यायालय के समक्ष सामने आए मामलों में यह बात भी स्पष्ट हुई है कि निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों की नियमितीकरण, पदोन्नति और सेवा संबंधी अधिकारों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जो शिक्षक आवश्यक योग्यता के बिना नियुक्त हुए हैं, उन्हें निर्धारित समय में योग्यता हासिल करने का अवसर दिया जा सकता है। लेकिन निर्धारित अवधि में आवश्यक योग्यता और TET पूरा नहीं करने की स्थिति में उनकी सेवा जारी रखने का दावा प्रभावित हो सकता है। National News
यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं में इसे देशभर के सभी स्कूल-कॉलेजों में शिक्षक नियुक्ति और जॉइनिंग पर व्यापक रोक के रूप में बताया जा रहा है, लेकिन उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड से ऐसा कोई सार्वभौमिक आदेश सामने नहीं आता। हालिया सुप्रीम कोर्ट का प्रमुख फैसला जम्मू-कश्मीर की Rehbar-e-Taleem (ReT) Scheme से जुड़े मामलों की पृष्ठभूमि में आया है। न्यायालय ने संबंधित चयनित उम्मीदवारों के अधिकारों और नियुक्ति प्रक्रिया पर निर्देश देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों को NCTE के नियमों के अनुसार न्यूनतम योग्यता हासिल करनी होगी और TET उत्तीर्ण करना होगा। इसलिए इस फैसले का व्यापक महत्व शिक्षक नियुक्तियों में निर्धारित योग्यता की अनिवार्यता को लेकर है, लेकिन इसे हर प्रकार की सरकारी, निजी स्कूल या कॉलेज शिक्षक भर्ती पर स्वतः लागू सामान्य नियुक्ति-प्रतिबंध बताना फिलहाल सही नहीं होगा। National News
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय Anjuman Ishaat-E-Taleem Trust बनाम State of Maharashtra का उल्लेख करते हुए कहा कि RTE Act की धारा 23 और NCTE की अधिसूचनाओं को साथ पढ़ने पर TET न्यूनतम योग्यता व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है। न्यायालय ने इसे केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना बल्कि शिक्षक पात्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण मानदंड माना है। इसका सीधा अर्थ यह है कि संबंधित RTE-covered elementary education पदों पर शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं हो सकती; लागू नियमों के अनुसार आवश्यक शैक्षणिक/प्रशिक्षण योग्यता के साथ TET भी जरूरी हो सकता है। National News
शिक्षक किसी भी शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में बिना निर्धारित योग्यता के नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख शिक्षा की गुणवत्ता से सीधे जुड़ता है।
न्यायालय ने अपने फैसलों में इस बात पर जोर दिया है कि न्यूनतम योग्यता का उद्देश्य शिक्षकों के लिए समान और निर्धारित मानक सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ी हुई है। National News
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू ऐसे शिक्षक हैं जो पहले से नियुक्त हैं, लेकिन निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करते। न्यायालय ने ऐसे मामलों में योग्यता हासिल करने के लिए समय दिए जाने की व्यवस्था को स्वीकार किया है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित नियुक्तियों के लिए NCTE की न्यूनतम योग्यता और TET पूरा करने की समय-सीमा निर्धारित की। निर्धारित अवधि में योग्यता हासिल नहीं करने वाले कर्मचारियों की सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। National News
RTE Act मुख्य रूप से elementary education यानी कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा से संबंधित है। इसलिए RTE-NCTE-TET से जुड़े इस आदेश को सीधे विश्वविद्यालयों और प्रत्येक कॉलेज शिक्षक नियुक्ति पर लागू मानना सही नहीं होगा। कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर की नियुक्तियों में संबंधित UGC अधिनियम, UGC Regulations तथा संबंधित विश्वविद्यालय/राज्य के भर्ती नियमों के अनुसार पात्रता निर्धारित होती है। इसलिए स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों की शिक्षक नियुक्तियों के नियमों को अलग-अलग देखना जरूरी है। National News
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद शिक्षक नियुक्तियों में योग्यता संबंधी नियमों की अनदेखी करने वाले मामलों पर राज्यों और संबंधित भर्ती संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। खासकर RTE के दायरे में आने वाले स्कूलों में NCTE द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता और TET की अनिवार्यता को लेकर स्पष्टता और अधिक बढ़ी है। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट है शिक्षक नियुक्ति केवल पद भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि निर्धारित वैधानिक योग्यता और शिक्षा के न्यूनतम मानकों का पालन करना आवश्यक है। National News
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