
Supreme Court : तमिलनाडु के शराब दुकानों के लाइसेंस विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ईडी अपनी सीमाएं पार कर रही है और यह केंद्र व राज्य के बीच संतुलन बनाए रखने वाली संघीय व्यवस्था के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार और राज्य की शराब वितरण एजेंसी टीएएसएमएसी (TASMAC) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने इस मामले में ईडी की ओर से जारी मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर अस्थायी रूप से रोक भी लगा दी है।
ईडी ने हाल ही में तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एजेंसी ने इसके तहत टीएएसएमएसी के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। यह कार्रवाई राज्य में शराब दुकानों के लाइसेंस आवंटन से जुड़े करीब 1000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर की गई थी।
सरकार की ओर से कहा गया कि वर्ष 2014 से अब तक इस मामले में 40 से अधिक एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद ईडी का दखल देना "संघीय प्रणाली पर हमला" है।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई करते हुए ईडी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कोर्ट ने ईडी के वकील, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से कहा, - “आपकी ईडी सभी सीमाएं लांघ रही है।” कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब यह मामला राज्य सरकार और उसकी एजेंसी से जुड़ा है, तो कैसे ईडी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर छापेमारी कर सकती है? कोर्ट ने टीएएसएमएसी पर की गई छापेमारी को लेकर भी सवाल किया।
इससे पहले डीएमके सरकार और टीएएसएमएसी ने मद्रास हाईकोर्ट के 23 अप्रैल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने ईडी को पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर स्थगन (Stay) लगा दिया है।
ईडी की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि यह मामला बड़ी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है और यह केवल एक राज्य का आंतरिक मामला नहीं है। उनका कहना था कि एजेंसी ने अपनी कानूनी शक्तियों के तहत ही कार्रवाई की है। Supreme Court