सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, पूरे देश में लागू होंगे नए नियम
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
24 Jul 2025 02:57 PM
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक अहम फैसला सुनाया है। अब आईपीसी की धारा 498ए (नई भारतीय न्याय संहिता के तहत धारा 85) के तहत दर्ज होने वाली शिकायत या एफआईआर के बाद दो महीने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इस अवधि में कोई पुलिस कार्रवाई भी नहीं की जा सकेगी। मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस ए. जी. मसीह की पीठ ने यह फैसला उस मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया, जिसमें एक आईपीएस अधिकारी पत्नी ने अपने पति और ससुर पर झूठे आरोप लगाकर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था। इसके चलते पति को 109 दिन और ससुर को 103 दिन जेल में रहना पड़ा था।
पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप निकले झूठे
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "जिस मानसिक और सामाजिक यातना से पति और ससुर गुजरे, उसकी ना तो भरपाई की जा सकती है और ना ही समाधान।" अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी द्वारा लगाए गए सभी आरोप झूठे साबित हुए। इसके बाद कोर्ट ने महिला को बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की गाइडलाइंस देशभर में होंगी लागू
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक मामलों में झूठे मुकदमों और दहेज उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तय की गई गाइडलाइंस देशभर में लागू रहेंगी। इन दिशानिर्देशों के तहत कहा गया है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड यानी शांतिपूर्वक समाधान का समय दिया जाए। इस दौरान किसी की गिरफ्तारी या दबाव में कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
फैमिली वेलफेयर कमिटी होगी अनिवार्य
कोर्ट ने यह भी कहा कि फैमिली वेलफेयर कमिटी (Family Welfare Committee) का गठन एक व्यावहारिक और संतुलित समाधान है, जो झूठे मामलों में फंसे निर्दोष लोगों को राहत दिला सकता है। यह समिति एफआईआर दर्ज होने के बाद तथ्यों की प्रारंभिक जांच करेगी और फिर आगे की प्रक्रिया तय होगी। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी जिलों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन गाइडलाइंस को कड़ाई से लागू करें। अदालत ने कहा कि इन उपायों से एक तरफ जहां झूठे मुकदमे और गैर-जरूरी गिरफ्तारी रोकी जा सकेगी, वहीं दूसरी ओर असली पीड़ितों को न्याय मिलने का रास्ता भी सुगम होगा।