छात्र आत्महत्या केस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, जारी की गाइडलाइन
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 08:34 PM
Supreme Court: देशभर में छात्रों की आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे प्रणालीगत विफलता करार दिया है। कोर्ट ने देश के सभी स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, विश्वविद्यालयों और छात्रावासों के लिए 15-बिंदुओं वाली विस्तृत गाइडलाइन जारी की है जिसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग, शिकायत निवारण और संस्थागत जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया है। यह बड़ा फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया जिसमें कहा गया कि जब नाबालिग और युवा छात्र परीक्षा के दबाव, सामाजिक तानों और संस्थानों की बेरुखी के चलते खुदकुशी जैसे कठोर कदम उठा रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि हमारी पूरी शैक्षणिक प्रणाली कहीं न कहीं असफल हो चुकी है।
NCRB के आंकड़े हैं चौंकाने वाले
इस फैसले की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है, जिसमें बताया गया कि साल 2022 में 13,044 छात्रों ने आत्महत्या की। 2001 में यह संख्या 5,425 थी यानी बीते दो दशकों में यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में देश में हुई हर 100 आत्महत्याओं में से 8 छात्र थे जिनमें से 2248 छात्रों ने सिर्फ परीक्षा में फेल होने के कारण आत्महत्या की।
क्या है गाइडलाइन के मुख्य बिंदु?
सुप्रीम कोर्ट ने जो 15-बिंदु दिशा-निर्देश जारी किए हैं उनमें कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं। छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और नियमित काउंसलिंग अनिवार्य की जाएं। हर शिक्षण संस्था में शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाया जाए। छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की निगरानी और संवाद को प्राथमिकता मिले। परीक्षा, अंक और करियर के दबाव को कम करने के लिए संवेदनशील शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाए। छात्रों के साथ बातचीत और समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता और समयबद्धता अपनाई जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ये निर्देश तब तक लागू रहेंगे, जब तक संसद या राज्य विधानसभाएं कोई उपयुक्त कानून या नियामक ढांचा तैयार नहीं करतीं। इन्हें संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत देशव्यापी कानूनी प्रभाव मिला है।
यह फैसला आंध्र प्रदेश की 17 वर्षीय NEET परीक्षार्थी की आत्महत्या के मामले से जुड़ा है, जो आकाश-बायजू कोचिंग संस्थान, विशाखापत्तनम में पढ़ाई कर रही थी। 14 जुलाई 2023 को छात्रावास में उसकी दुखद मौत हुई। उसके पिता ने स्थानीय जांच एजेंसियों पर भरोसा न जताते हुए मामले की CBI जांच की मांग की थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को जांच का आदेश दिया।
राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है काम
पीठ ने अपने निर्णय में कहा, "यह कोई सामान्य संकट नहीं, बल्कि संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग कर रहा है। जब छात्र संस्थागत असंवेदनशीलता और मानसिक दबाव में टूटते हैं, तो ये केवल व्यक्तिगत त्रासदियां नहीं होतीं, बल्कि यह व्यवस्था की चूक होती है।" सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ये दिशानिर्देश पूर्व न्यायमूर्ति रवींद्र एस. भट्ट की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य टास्क फोर्स के कार्यों को भी समर्थन देंगे, जो छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य नीति पर काम कर रहा है।