IPL की आड़ में बढ़ती सट्टेबाजी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
24 May 2025 07:18 PM
Supreme Court : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि, आईपीएल के नाम पर देशभर में लोग सट्टा और जुआ खेल रहे हैं और यह एक गंभीर सामाजिक विकृति बन चुका है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि वह इस पर क्या कदम उठा रही है।
बच्चों और युवाओं का जीवन हो रहा बर्बाद
याचिकाकर्ता के.ए. पाल ने अपनी जनहित याचिका में दावा किया है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के एप्स ने बच्चों और युवाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है। कई किशोर इन ऐप्स की गिरफ्त में आकर आत्महत्या तक कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे उन लाखों माता-पिता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिनके बच्चे इन जालों में फंस चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई प्रभावशाली हस्तियां, अभिनेता और पूर्व क्रिकेटर इन सट्टेबाजी ऐप्स का खुलेआम प्रचार कर रहे हैं और बच्चों व युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया कि क्रिकेट के "भगवान" कहे जाने वाले दिग्गज खिलाड़ी ने भी ऐसे एक ऐप का समर्थन किया है जिससे युवाओं में इसका असर और गहराता जा रहा है।
सिगरेट पर चेतावनी होती है, सट्टेबाजी ऐप पर क्यों नहीं?
याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि, जैसे सिगरेट के पैकेट पर धूम्रपान से होने वाले नुकसान की चेतावनी दी जाती है, वैसे ही सट्टेबाजी ऐप्स पर भी चेतावनी क्यों नहीं दी जाती? तेलंगाना राज्य का हवाला देते हुए याचिका में बताया गया कि वहां 1,023 से अधिक लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें से कई मामलों में 25 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और फिल्मी कलाकारों की भूमिका भी सामने आई है। इन मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "हमने बच्चों को इंटरनेट थमा दिया है, और अब बच्चे क्या देख रहे हैं, इस पर किसी का नियंत्रण नहीं। माता-पिता एक टीवी देख रहे हैं और बच्चे दूसरा। ये पूरी तरह सामाजिक विकृति बन चुकी है।" कोर्ट ने इस बात को स्वीकारा कि कोई भी कानून लोगों को स्वेच्छा से सट्टा लगाने से नहीं रोक सकता, ठीक वैसे ही जैसे कानून लोगों को हत्या करने से नहीं रोक सकता।
सिर्फ कानून बनाकर नहीं किया जा सकता हल
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सहमति जताते हुए कहा कि समस्या गंभीर है, लेकिन इसे सिर्फ कानून बनाकर हल नहीं किया जा सकता। "फिर भी, हम केंद्र सरकार से जरूर पूछेंगे कि वह इस दिशा में क्या कर रही है।" Supreme Court