क्या देश की हर अदालत में महिला वकीलों को अलग बार रूम और टॉयलेट की सुविधा मिलेगी ? महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठने के बाद न्यायिक परिसरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हुए हैं।
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National News : देश की अदालतों में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और टॉयलेट जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला वकीलों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की कमी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस दिशा में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हाई कोर्ट को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। National News
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सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष महिला वकीलों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति से जुड़े तथ्य रखे गए। मुख्य न्यायाधीश ने जोर दिया कि अदालतों में काम करने वाले बार के सभी सदस्यों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना संबंधित सरकारों और हाई कोर्ट की जिम्मेदारी है। इस मामले ने न्यायिक परिसरों में महिला वकीलों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराने की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। National News
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सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी की ओर से राज्यों के हलफनामों में सामने आई जानकारी का उल्लेख किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पंजाब के 67 जिला अदालत परिसरों में से केवल नौ में महिला वकीलों के लिए वॉशरूम उपलब्ध होने की बात सामने आई। हरियाणा में इस संबंध में निरीक्षण नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया गया। कोलकाता की अदालतों में महिला वकीलों के लिए टॉयलेट की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन उदाहरणों ने अदालत परिसरों में महिलाओं के लिए आवश्यक सुविधाओं की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। National News
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जिला अदालतों, उप-मंडलीय अदालतों और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और वॉशरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जानी है। इसके लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरत के अनुसार धन और जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सुविधाओं के निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। National News
अदालत ने हाई कोर्ट की बिल्डिंग कमेटियों से इस काम को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने को कहा है। साथ ही, प्रगति की निगरानी और संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
महिला वकीलों के लिए सुविधाओं के डिजाइन और निर्माण में एकरूपता लाने का मुद्दा भी उठाया गया है, ताकि अलग-अलग राज्यों और अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाओं के मानकों में अनावश्यक अंतर न रहे। National News
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