सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अदालतों को निचला कहना...
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
24 May 2025 07:48 PM
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी अदालत को ‘निचली अदालत’ कहना भारत के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने 1981 के एक हत्या के मामले में दो दोषियों को बरी करते हुए की।
'निचली अदालत' नहीं, 'न्यायालय' कहें-सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस ओका ने फैसले में कहा, "हम 8 फरवरी 2024 को जारी आदेश की बात दोहराते हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि ट्रायल कोर्ट या किसी अन्य अदालत को 'निचली अदालत' के रूप में संदर्भित नहीं किया जाना चाहिए। यह संविधान की भावना और लोकाचार के खिलाफ है।" उन्होंने बताया कि इस निर्देश को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने फरवरी 2023 में एक सर्कुलर भी जारी किया था। उन्होंने सभी हाई कोर्ट्स से इस निर्देश को गंभीरता से लेने और उसके अनुसार कार्य करने की अपील की।
1981 के हत्या मामले में दोषियों को मिली राहत
यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट 1981 में दर्ज एक हत्या के मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 1982 में दोषी ठहराया था और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2018 में सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब दोनों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने निष्पक्ष जांच नहीं की और कुछ अहम गवाहों के बयानों को छिपाया गया जो मामले की सच्चाई सामने ला सकते थे।
निष्पक्ष जांच हर आरोपी का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस ओका ने अपने फैसले में कहा, "भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। यह सिर्फ अदालत का ही नहीं, बल्कि पुलिस का भी दायित्व है कि वह निष्पक्ष जांच करे। यह न्याय प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।" Supreme Court