सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिजली के बिल में आने वाली है गर्मी
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:04 PM
देश की राजधानी दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही झटका लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बिजली वितरण कंपनियों के वर्षों पुराने बकाया भुगतान के मामले में दरें बढ़ाने की सशर्त अनुमति दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि दरें बढ़ाई जा सकती हैं लेकिन यह बढ़ोतरी वाजिब (Reasonable) और किफायती (Affordable) होनी चाहिए। Supreme Court
कई राज्यों में बढ़ सकती है बिजली बिल
न्यायालय ने दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) को निर्देश दिया है कि वह एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करे जिसमें बताया जाए कि दरों में बढ़ोतरी कब, कैसे और कितनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि देश के कई राज्यों में बिजली की कीमतें अब उपभोक्ताओं के लिए बढ़ सकती हैं।
आम उपभोक्ता पर बोझ
दरअसल, यह मामला बिजली वितरण कंपनियों द्वारा वर्षों से लंबित बकाया भुगतान से जुड़ा था। कोर्ट ने इन लंबित नियामक परिसंपत्तियों (Regulatory Assets) को अगले 4 वर्षों के भीतर खत्म करने के निर्देश दिए हैं। मतलब यह कि अब इन भुगतानों की भरपाई उपभोक्ताओं से ही की जाएगी जिसका सीधा असर बिजली के बिलों पर दिखेगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लंबे समय तक टलते रहे बकाये आखिरकार आम उपभोक्ता पर बोझ बनते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि नियामक आयोगों और एपीटीईएल ने समय रहते उचित निर्णय नहीं लिए, जिससे यह समस्या वर्षों तक बनी रही।
कोर्ट के आदेश के बाद होगा सख्त एक्शन
बिजली वितरण कंपनियों का तर्क है कि वे बिजली खरीदने और सप्लाई करने में जितना खर्च करती हैं, उतना वसूली नहीं कर पातीं जिससे घाटा होता है। इस घाटे को ही नियामकीय परिसंपत्तियां कहा जाता है। अब कोर्ट के आदेश के बाद यह घाटा धीरे-धीरे उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। दिल्ली में यह भुगतान पिछले 17 सालों से लंबित है और इसकी कुल रकम 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, तमिलनाडु में 2024 तक यह बकाया 87,000 करोड़ रुपये तक हो गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि आने वाले समय में बिजली की कीमतें आवासीय से लेकर औद्योगिक उपयोगकर्ताओं तक सभी के लिए बढ़ सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक ओर जहां वितरण कंपनियों को राहत दी है, वहीं आम लोगों की जेब पर असर डालने वाला निर्णय भी साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि DERC समेत अन्य राज्य आयोग इस रोडमैप को कैसे लागू करते हैं और उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों के लिए कैसे तैयार किया जाता है। Supreme Court