कोलकता रेप केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नेशनल टास्क फोर्स का किया गठन
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 07:12 PM
Supreme Court : कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप हत्या को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है, एक तरफ जहां डॉक्टर अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार आवाज उठाई जा रही है। इस बीच मंगलवार को इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी सुनवाई की। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से 22 अगस्त तक रिपोर्ट मांगी है। वहीं इस केस की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
कोलकाता रेप केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त Supreme Court
आपको बता दें कि कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की है। इस दौरान SC ने पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य की प्रशासन व्यवस्था को लेकर कई सख्त टिप्पणियां की। सीजेआई की अध्यक्षता में हुई इस सुनवाई में कोर्ट ने पूछा कि आखिर मामले के एफआईआर करने में इतनी देरी क्यों की गई? इसके अलावा कोर्ट ने अस्पताल में हुई तोड़फोड़ पर सवाल उठाए। वहीं पूर्व प्रिंसिपल पर भी सख्त टिप्पणी की। आइए जानते हैं कि इस सुनवाई के दौरान SC ने क्या-क्या कहा...
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करते हुए कहा कि, हर बार बलात्कार और हत्या होने पर देश की अंतरात्मा नहीं जागनी चाहिए। यह घटना भयावह नहीं बल्कि पूरे भारत में डॉक्टरों की सुरक्षा की कमियों को उजागर करता है। CJI ने अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल कड़े किए, उन्होंने कहा हम अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। कोर्ट ने कहा, अगर महिलाएं काम पर नहीं जा सकतीं और सुरक्षित नहीं रह सकतीं तो हम उन्हें बुनियादी समानता से वंचित कर रहे हैं।
इसके अलावा कोर्ट ने पीड़िता की पहचान को लेकर भी चिंता जताई है। CJI ने कहा, प्रिंसिपल ने इसे आत्महत्या बताने की कोशिश की, माता-पिता को शव देखने की इजाजत नहीं! इसी के साथ CJI ने पश्चिम बंगाल सरकार और हॉस्पिटल प्रशासन को फटकार लगाई, कहा एफआइआर देर से क्यों दर्ज हुई? हॉस्पिटल प्रशासन आखिर क्या कर रहा था? इतना ही नहीं अस्पताल में हुई तोड़फोड़ पर भी सवाल दगा, कहा पुलिस को घटनास्थल की सुरक्षा करनी चाहिए। आखिर 7 हजार लोग वहां दाखिल कैसे हुए? कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ हत्यारा नहीं बल्कि एक विकृत व्यक्ति है। कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती को लेकर भी पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नहीं रोका जा सकता। Supreme Court
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