NEET-PG में सीट ब्लॉकिंग पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, अब नहीं चलेगी चालाकी
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
27 Nov 2025 04:33 AM
Supreme Court : NEET-PG काउंसलिंग प्रक्रिया में सीट ब्लॉकिंग जैसी अनैतिक प्रथाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पीजी मेडिकल सीटों को जानबूझकर ब्लॉक करना केवल एक व्यक्तिगत गलती नहीं बल्कि यह सिस्टम में मौजूद गहरी खामियों का प्रतीक है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी हरकतें पारदर्शिता नीति प्रवर्तन और नियामक जवाबदेही की कमी को उजागर करती हैं।
अब छात्रों को नहीं करना पड़ेगा धोखाधड़ी का सामना
अब NEET-PG काउंसलिंग में भाग लेने वाले सभी निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों को काउंसलिंग शुरू होने से पहले ही ट्यूशन फीस, हॉस्टल चार्ज, सिक्योरिटी डिपॉज़िट और अन्य सभी खर्चों का खुलासा करना अनिवार्य होगा। इससे छात्र पहले से ही वित्तीय भार की स्पष्ट जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और उन्हें भ्रम या धोखाधड़ी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को निर्देश दिया है कि एक केंद्रीकृत शुल्क विनियमन ढांचा बनाया जाए ताकि सभी संस्थानों पर एक समान निगरानी रखी जा सके।
सीट ब्लॉक करने वाले छात्रों और संस्थानों पर होगी कड़ी कार्रवाई
कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया है कि सीट ब्लॉक करने वाले छात्रों और संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इनमें सुरक्षा राशि जब्त करना, NEET-PG की आगामी परीक्षाओं से अयोग्य घोषित करना और दोषी कॉलेजों को ब्लैकलिस्ट करना शामिल है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने अखिल भारतीय कोटा और राज्य स्तरीय काउंसलिंग राउंड्स को एक समन्वित राष्ट्रीय कैलेंडर के अंतर्गत लाने का निर्देश भी दिया है, ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी हो सके।
किसी भी तरह की लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त
इसके अलावा, NEET-PG परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मल्टी-शिफ्ट परीक्षा के बाद कच्चे अंक, उत्तर कुंजी और सामान्यीकरण फॉर्मूले को सार्वजनिक करने का भी निर्देश दिया है। इस फैसले से यह स्पष्ट संकेत गया है कि अब मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में कोई ढील या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग की याचिका पर आया, जिसमें 2018 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दो छात्रों को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। वे छात्र सीट ब्लॉकिंग के कारण अपना हक पाने से वंचित रह गए थे। Supreme Court