बिहार विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वर्ष 2024-25 की राज्य वित्त रिपोर्ट ने सरकारी विभागों में वित्तीय जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

CAG Report : बिहार विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वर्ष 2024-25 की राज्य वित्त रिपोर्ट ने सरकारी विभागों में वित्तीय जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक राज्य के विभिन्न विभागों और एजेंसियों द्वारा 92,132.75 करोड़ की राशि से जुड़े 62,632 उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilisation Certificates-UCs) प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं पात्रता) कार्यालय में जमा नहीं कराए गए। CAG ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लंबित UCs से धन के दुरुपयोग, गबन और अनियमितताओं का जोखिम बढ़ जाता है।
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जब सरकार किसी विभाग, स्थानीय निकाय या संस्था को किसी योजना के लिए अनुदान जारी करती है, तो संबंधित विभाग को यह प्रमाणित करना होता है कि धनराशि उसी उद्देश्य पर खर्च की गई जिसके लिए उसे स्वीकृत किया गया था। इसी प्रमाण को उपयोगिता प्रमाणपत्र (UC) कहा जाता है। समय पर UC जमा न होने का मतलब यह नहीं है कि भ्रष्टाचार सिद्ध हो गया है, लेकिन इससे खर्च का सत्यापन नहीं हो पाता और वित्तीय पारदर्शिता प्रभावित होती है।
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रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा और पंचायती राज विभागों से जुड़े हैं। CAG ने कहा कि इन विभागों में वर्षों से बड़ी राशि के UCs लंबित हैं, जिससे सरकारी धन के उपयोग की पुष्टि नहीं हो पा रही है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए जाते हैं तो यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि सरकारी धन निर्धारित उद्देश्य पर ही खर्च हुआ। ऐसी स्थिति में धन के दुरुपयोग, गबन, गलत मद में खर्च या वित्तीय अनियमितता की आशंका बनी रहती है। CAG ने संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने और लंबित UCs जल्द जमा कराने की सिफारिश की है।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य के कुल बजट का पूरा उपयोग नहीं हो सका। बड़ी राशि बची रही, जबकि अनुपूरक बजट के जरिए अतिरिक्त प्रावधान किए गए थे। CAG ने बजट अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को बेहतर वित्तीय योजना की आवश्यकता से जोड़ा है।
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CAG ने मनरेगा के क्रियान्वयन में कई प्रशासनिक कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में स्वीकृत पद खाली हैं, कई वर्षों से अग्रिम राशि समायोजित नहीं हुई है और योजना की निगरानी में भी खामियां पाई गई हैं। इसके अलावा 'हर घर नल का जल' योजना, शिक्षा विभाग और अन्य परियोजनाओं में भी प्रक्रियागत कमियों का उल्लेख किया गया है।
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