जंतर-मंतर विवाद में हिंदुत्व के समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ीं। निशु आजाद मामले में POCSO के तहत नई FIR और पहले से दर्ज मामले में SC-ST एक्ट की धाराएं जुड़ने से कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है।

National News : जंतर-मंतर विवाद में बढ़ी मुश्किलें, नाबालिग से जुड़े मामले में पॉक्सो के तहत केस; पहले से दर्ज FIR में SC-ST एक्ट की धाराएं भी शामिल जंतर-मंतर पर हुए विवाद में सोशल मीडिया पर चर्चित एक्टिविस्ट एवं हिंदुत्व समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब POCSO एक्ट के तहत अलग FIR दर्ज की है, जबकि पहले से दर्ज मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इस मामले को लेकर दिल्ली की राजनीति और सोशल मीडिया पर लगातार बहस चल रही है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने यह नई कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की है। मामले में नाबालिग से संबंधित आरोप सामने आने के बाद पॉक्सो कानून के तहत अलग मामला दर्ज किया गया है। वहीं, निशु आजाद के पिता के साथ हुई कथित मारपीट से संबंधित पुरानी FIR में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ी गई हैं। National News
यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता के सिर में चोट लगी थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर इससे संबंधित वीडियो और स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट में किए गए कथित दावों को लेकर विवाद काफी बढ़ गया। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब भारद्वाज के कथित पॉडकास्ट बयान को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रसारित किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। दिल्ली पुलिस ने मामले में जांच शुरू की और बाद में स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। National News
दूसरी ओर, स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करने के बजाय घटना को आत्मरक्षा का मामला बताया है। उनका कहना है कि उन्हें कई लोगों ने घेर लिया था और यदि उन्होंने आत्मरक्षा में कदम नहीं उठाया होता तो उनके साथ गंभीर घटना हो सकती थी। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि निशु आजाद के पिता को लगी चोट गंभीर नहीं थी और उनके पास घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी संदर्भ से अलग अथवा फर्जी बताया है। National News
मामले में सबसे महत्वपूर्ण नया घटनाक्रम POCSO एक्ट के तहत नई FIR और पुरानी FIR में SC/ST एक्ट का जुड़ना है। POCSO कानून के तहत मामला दर्ज होने का अर्थ यह है कि पुलिस को अब आरोपों की जांच बाल यौन अपराधों से संरक्षण संबंधी विशेष कानूनी प्रावधानों के तहत करनी होगी। वहीं SC/ST एक्ट की धाराएं जुड़ने से पहले से दर्ज मामले का कानूनी स्वरूप भी गंभीर हो गया है। हालांकि इन धाराओं के तहत आरोप लगना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्य और आगे न्यायिक प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन धाराओं में मामला आगे बढ़ता है। National News
इस पूरे विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज के कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। भारद्वाज ने अपने बचाव में कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को भाई जैसा बताते हुए उनके प्रभाव के कारण खुद को बचाए जाने के आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके कुछ बयान व्यंग्य के तौर पर कहे गए थे। इसी बीच मामले को लेकर विपक्षी नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस तथा अन्य नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए, जबकि प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शुरुआती कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी। National News
यह सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि स्वतंत्र भारद्वाज को कितने समय तक जेल में रहना पड़ेगा। जेल में रहना, जमानत मिलना या आगे आरोपों पर सजा होना अदालत की प्रक्रिया और मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि मामले में कानूनी धाराओं का दायरा बढ़ गया है। POCSO की नई FIR और SC/ST एक्ट के जुड़ने के बाद पुलिस जांच का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हो गया है। ऐसे में स्वतंत्र भारद्वाज के लिए आने वाले दिन कानूनी तौर पर बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। National News
जंतर-मंतर की घटना अब केवल दो पक्षों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गई है। एक ओर स्वतंत्र भारद्वाज अपने बचाव में आत्मरक्षा का तर्क दे रहे हैं, वहीं शिकायतकर्ताओं की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कार्रवाई यह तय करेगी कि वास्तविक घटनाक्रम क्या था और आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कानूनी शिकंजा निश्चित रूप से पहले की तुलना में मजबूत हुआ है और POCSO तथा SC/ST एक्ट की कार्रवाई ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर फिर सुर्खियों में ला दिया है। National News
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