कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान दलित छात्रा निशु आजाद के पिता का सिर फोडऩे वाले सोशल मीडिया से सुर्खियां बटोर रहे स्वतंत्र भारद्वाज को अब जीवन भर जेल में सडऩा पडेगा। दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के विरूद्ध गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए हैं।

National News : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान दलित छात्रा निशु आजाद के पिता का सिर फोडऩे वाले तथा सोशल मीडिया से सुर्खियां बटोर रहे स्वतंत्र भारद्वाज को अब जीवन भर जेल में सडऩा पडेगा। दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज के विरूद्ध गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में SC/ ST ACt तथा POCSO Act सहित IT ACT के मामले भी शामिल हैं। आपको बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के आंदोलन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज उर्फ स्वतंत्र आजाद नाम के एक युवक ने दलित छात्रा निशु आजाद के पिता का सिर फोडक़र सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें कहीं थी। बड़बोले स्वतंत्र आजाद ने बड़े-बड़े दावे करते हुए यहां तक कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसके बड़े भाई हैं। बड़े भाई का पूरा आर्शीवाद उसे प्राप्त है। बड़े भाई का आर्शीवाद होते हुए दुनिया की कोई ताकत उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। अब दिल्ली पुलिस ने बड़े भाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आर्शीवाद के बावजूद स्वतंत्र भारद्वाज का पूरा ‘‘इलाज’’ कर दिया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों का दावा है कि स्वतंत्र भारद्वाज के विरूद्ध लगाई गई SC/ ST ACt, POCSO Act तथा IT ACT की धाराओं के कारण उसे अब जिंदगी भर जेल में ही रहना पड़ेगा।
यहां यह बताना भी आवश्यक है कि यह स्वतंत्र भारद्वाज सोशल मीडिया पर हिन्दुवादी छवि बनाने में लगा हुआ था इसी कारण यह स्वतंत्र भारद्वाज राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) तथा भारतीय जनता पार्टी BJP के बड़े-बड़े नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें खिंचवाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था, रील बनाता था तथा अलग-अलग यू-ट्यूब चैनल पर जाकर बड़े-बड़े दावे करने वाले पॉडकास्ट रिकॉर्ड कराता था । दिल्ली पुलिस के जानकार सूत्रों का दावा है कि अब स्वतंत्र भारद्वाज को अपनी सारी गतिविधियां बंद करके दिल्ली की तिहाड़ जेल में ही जीवन बिताना पड़ेगा।
आपको यह भी बता दें कि जंतर-मंतर पर हुए विवाद में सोशल मीडिया पर चर्चित एक्टिविस्ट एवं हिंदुत्व समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब POCSO ACT के तहत अलग FIR दर्ज की है, जबकि पहले से दर्ज मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इस मामले को लेकर दिल्ली की राजनीति और सोशल मीडिया पर लगातार बहस चल रही है। चेतना मंच की टीम की मुताबिक पुलिस ने यह नई कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की है। मामले में नाबालिग से संबंधित आरोप सामने आने के बाद POCSO ACT के तहत अलग मामला दर्ज किया गया है। वहीं, निशु आजाद के पिता के साथ हुई कथित मारपीट से संबंधित पुरानी FIR में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ी गई हैं। National News
यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता के सिर में चोट लगी थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर इससे संबंधित वीडियो और स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट में किए गए कथित दावों को लेकर विवाद काफी बढ़ गया। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब भारद्वाज के कथित पॉडकास्ट बयान को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रसारित किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। दिल्ली पुलिस ने मामले में जांच शुरू की और बाद में स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। National News
दूसरी ओर, स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करने के बजाय घटना को आत्मरक्षा का मामला बताया है। उनका कहना है कि उन्हें कई लोगों ने घेर लिया था और यदि उन्होंने आत्मरक्षा में कदम नहीं उठाया होता तो उनके साथ गंभीर घटना हो सकती थी। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि निशु आजाद के पिता को लगी चोट गंभीर नहीं थी और उनके पास घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी संदर्भ से अलग अथवा फर्जी बताया है। National News
मामले में सबसे महत्वपूर्ण नया घटनाक्रम POCSO ACT के तहत नई FIR और पुरानी FIR में SC/ST एक्ट का जुड़ना है। POCSO कानून के तहत मामला दर्ज होने का अर्थ यह है कि पुलिस को अब आरोपों की जांच बाल यौन अपराधों से संरक्षण संबंधी विशेष कानूनी प्रावधानों के तहत करनी होगी। वहीं SC/ST एक्ट की धाराएं जुड़ने से पहले से दर्ज मामले का कानूनी स्वरूप भी गंभीर हो गया है। हालांकि इन धाराओं के तहत आरोप लगना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्य और आगे न्यायिक प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन धाराओं में मामला आगे बढ़ता है। National News
इस पूरे विवाद में स्वतंत्र भारद्वाज के कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। भारद्वाज ने अपने बचाव में बड़े भाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को भाई जैसा बताते हुए उनके प्रभाव के कारण खुद को बचाए जाने के आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके कुछ बयान व्यंग्य के तौर पर कहे गए थे। इसी बीच मामले को लेकर विपक्षी नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस तथा अन्य नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए, जबकि प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शुरुआती कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी। National News
यह सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि स्वतंत्र भारद्वाज को कितने समय तक जेल में रहना पड़ेगा। जेल में रहना, जमानत मिलना या आगे आरोपों पर सजा होना अदालत की प्रक्रिया और मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि मामले में कानूनी धाराओं का दायरा बढ़ गया है। POCSO ACT की नई FIR और SC/ST ACT के जुड़ने के बाद पुलिस जांच का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हो गया है। ऐसे में स्वतंत्र भारद्वाज के लिए आने वाले दिन कानूनी तौर पर बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। National News
जंतर-मंतर की घटना अब केवल दो पक्षों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गई है। एक ओर स्वतंत्र भारद्वाज अपने बचाव में आत्मरक्षा का तर्क दे रहे हैं, वहीं शिकायतकर्ताओं की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और अदालत की कार्रवाई यह तय करेगी कि वास्तविक घटनाक्रम क्या था और आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कानूनी शिकंजा निश्चित रूप से पहले की तुलना में मजबूत हुआ है और POCSO तथा SC/ST एक्ट की कार्रवाई ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर फिर सुर्खियों में ला दिया है। National News
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