
यहूदियों की सीरिया (Syria) में उपस्थिति चौथी सदी ईसा पूर्व से जुड़ी हुई है। पहले विश्व युद्ध तक वहां करीब 40 हजार यहूदी निवास करते थे। हालांकि 1948 में इजराइल की स्थापना के बाद अरब देशों में यहूदियों को संदेह की नजर से देखा जाने लगा। सीरिया में यहूदी विरोधी माहौल बना और धीरे-धीरे वहां से इनका पलायन शुरू हो गया।
दमिश्क की अल-मानसेह सिनेगॉग पर 1949 में हुए ग्रेनेड हमले में 12 यहूदियों की मौत और कई घायल हुए। इस घटना ने यहूदी समुदाय को वहां से पलायन के लिए मजबूर कर दिया। युवा यहूदी गोलान हाइट्स पार कर इजराइल पहुंचे, कुछ ने इजरायली सेना में भर्ती होकर नई शुरुआत की।
इजराइल से आगे कुछ यहूदी अमेरिका जाना चाहते थे, लेकिन संक्रामक बीमारियों के डर से अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें वीजा नहीं दिया। तब उन्होंने मैक्सिको की ओर रुख किया। वेराक्रूज़ से होते हुए वे मैक्सिको सिटी पहुंचे, जहां पहले से बसे यहूदी समुदाय ने उन्हें सहारा दिया।
वर्तमान में मैक्सिको में करीब 30 हजार सीरियाई (Syria) यहूदी रहते हैं, जिनमें अलेप्पो और दमिश्क मूल के दो अलग-अलग समूह हैं। वे धार्मिक रीति-रिवाज़ों का पालन करते हैं और इजराइल से उनका भावनात्मक जुड़ाव बना हुआ है।
सीरियाई (Syria) यहूदी आज इजराइल, अमेरिका, पनामा, अर्जेंटीना और ब्राज़ील जैसे देशों में बस गए हैं, लेकिन अपने समुदाय, परंपरा और संस्कृति को अब भी सहेज कर रखे हुए हैं।