टाटा ट्रस्ट में अंदरूनी लड़ाई, नोएल टाटा पर लगे समूह कब्जाने के आरोप
भारत
चेतना मंच
06 Oct 2025 12:21 PM
देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूह टाटा संस में चल रहे विवाद अब सार्वजनिक हो चुके हैं। नोएल टाटा के नेतृत्व और उनके फैसलों पर कई ट्रस्टियों की असहमति सामने आ रही है। बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्र सरकार के मंत्री और टाटा संस के वरिष्ठ अधिकारी आज एक अहम बैठक करेंगे जिसमें इस झगड़े को सुलझाने की कोशिश होगी। Tata Group
लगातार बढ़ रहा है मामला
पिछले साल अक्टूबर में दिग्गज कारोबारी रतन टाटा के निधन के बाद से टाटा समूह की स्थिति स्थिर नहीं हो पाई है। नोएल टाटा ने तो कमान संभाल ली लेकिन अंदरूनी कलह और शक्ति परीक्षण के संकेत लगातार मिलते रहे। अब मामला इतना बढ़ गया है कि सरकार को बीच में आना पड़ा है।
बैठक में विवाद पर करेंगे चर्चा
टाटा समूह की देखरेख करने वाले टाटा ट्रस्ट्स में बहुमत शेयरधारकों के बीच विवाद खुलकर सामने आया है। नमक से लेकर तकनीक तक कई सेक्टर में काम करने वाला यह 157 साल पुराना समूह देश का सबसे मूल्यवान कारोबार माना जाता है। सोमवार को दो केंद्रीय कैबिनेट मंत्री टाटा समूह के अधिकारियों के साथ बैठक में विवाद पर चर्चा करेंगे। बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा भी मौजूद रहेंगे।
ट्रस्ट और निदेशक मंडल का विवाद
सूत्रों के अनुसार, बैठक में टाटा ट्रस्ट और ट्रस्टियों के बीच शक्तियों के बंटवारे और नियंत्रण को लेकर बातचीत होगी ताकि टाटा संस और इसकी कंपनियों के कामकाज पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। टाटा ट्रस्ट की अगली बैठक 10 अक्टूबर को होनी है उससे पहले विवाद का समाधान निकालने की कोशिश होगी।
क्या है सबसे बड़ा मुद्दा?
सबसे बड़ा मुद्दा टाटा संस के बोर्ड में निदेशकों की नियुक्ति और हटाने को लेकर है। विशेष रूप से पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को हटाने और उनकी जगह मेहली मिस्त्री को नियुक्त करने के प्रस्ताव को लेकर मतभेद है। वेणु श्रीनिवासन और नोएल टाटा ने इस नियुक्ति का विरोध किया है, जबकि ट्रस्टी प्रमित झवेरी, डेरियस खंबाटा और जहांगिर ने इसका समर्थन किया है।
एक ट्रस्टी ने अन्य सदस्यों को ईमेल में चेतावनी दी है कि 10 अक्टूबर को होने वाली बैठक में वेणु श्रीनिवासन को भी विजय सिंह की तरह हटाने की बात कही जा रही है। इससे ट्रस्ट के भीतर तनाव और बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इसे टाटा संस को हाईजैक करने और उस पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। समूह के संचालन पर इस विवाद का असर पड़ सकता है खासकर तब जब कंपनी में कई बोर्ड पद खाली हैं और नियुक्ति को लेकर सहमति नहीं बन पा रही। Tata Group