इन देशों में नल का पानी है बोतलबंद मिनरल वॉटर से भी शुद्ध

दुनिया में पानी की गुणवत्ता मापने के लिए 'एनवायर्नमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स' (EPI) का इस्तेमाल होता है। येल यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा जारी इस सूचकांक में पानी की स्वच्छता, सीवेज ट्रीटमेंट और जल प्रबंधन जैसे मानकों पर देशों को अंक दिए जाते हैं।

Freshwater
शुद्ध जल की बहार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Mar 2026 02:22 PM
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Many large countries have access to clean drinking water : भारत समेत दुनिया के कई बड़े देशों में लोग साफ पानी पीने के लिए आरओ (RO) फिल्टर लगवाते हैं या पानी को उबालकर पीते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे भी देश हैं, जहां घर के नल (टैप) से निकलने वाला पानी सीधे पीने योग्य होता है? वहां लोगों को न तो पानी उबालने की जरूरत होती है और न ही बोतलबंद पानी खरीदने की। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन देशों का नल का पानी बोतलबंद मिनरल वॉटर से भी ज्यादा साफ और सुरक्षित माना जाता है।

साफ पानी एक बड़ी चुनौती

संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, धरती पर कुल पानी का सिर्फ 2.5% से 3% हिस्सा ही मीठा पानी (Freshwater) है। इसमें से भी बहुत कम हिस्सा सीधे पीने लायक होता है। ऐसे में साफ और सुरक्षित पेयजल आज पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जहां कई देश पानी की गुणवत्ता को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं कुछ देश जल प्रबंधन में दुनिया को मात दे रहे हैं।

कैसे तय होती है पानी की गुणवत्ता?

दुनिया में पानी की गुणवत्ता मापने के लिए 'एनवायर्नमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स' (EPI) का इस्तेमाल होता है। येल यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा जारी इस सूचकांक में पानी की स्वच्छता, सीवेज ट्रीटमेंट और जल प्रबंधन जैसे मानकों पर देशों को अंक दिए जाते हैं। हालिया रिपोर्ट्स में यूरोप और नॉर्डिक देशों ने इस मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जहां नल का पानी 100% सुरक्षित है:

1. स्विट्जरलैंड (Switzerland)

स्विट्जरलैंड को दुनिया के सबसे साफ पानी वाले देश का दर्जा मिला है। यहां का पानी सीधे ग्लेशियर, पहाड़ों और झीलों से आता है। सरकार ने जल गुणवत्ता पर बेहद सख्त नियम बनाए हैं। यहां नल का पानी नियमित रूप से जांचा जाता है और बिना उबाले पीने योग्य होता है।

2. फिनलैंड (Finland)

फिनलैंड को 'हजार झीलों का देश' कहा जाता है। यहां प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला पानी प्रदूषण मुक्त है। EPI में फिनलैंड को जल गुणवत्ता के मामले में बहुत उच्च अंक मिले हैं। यहां के लोग बिना किसी हिचक के सीधे नल का पानी पीते हैं।

3. नॉर्वे (Norway)

नॉर्वे में पानी की साफ-सफाई का स्तर बेहद ऊंचा है। यहां पहाड़ी स्रोतों और बर्फ से पिघलने वाले पानी का इस्तेमाल होता है। कम औद्योगिक प्रदूषण और सख्त सरकारी नियंत्रण की वजह से यहां का पानी बेहद शुद्ध माना जाता है।

 4. आइसलैंड (Iceland)

आइसलैंड का पानी सबसे अनूठा है। यहां का पानी ज्वालामुखीय चट्टानों से होकर गुजरता है, जो एक प्राकृतिक फिल्टर का काम करती हैं। इस कारण यहां का पानी बेहद साफ और खनिज युक्त होता है। यहां बोतलबंद पानी की खपत बहुत कम है और पर्यटक भी सीधे नल का पानी पी सकते हैं।

अन्य प्रमुख देश

इनके अलावा, ऑस्ट्रिया, ग्रीस, आयरलैंड, माल्टा, नीदरलैंड और यूके (UK) में भी नल का पानी बेहद साफ और पीने योग्य है। इन देशों में पानी को लेकर लोगों को कोई दिक्कत नहीं होती और वे बिना किसी डर के टैप वॉटर का इस्तेमाल करते हैं। Many large countries have access to clean drinking water

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नेताजी की मौत का अनसुलझा रहस्य, एक ऐतिहासिक पहेली

1947 की एक फ्रांसीसी खुफिया सेवा (सीक्रेट सर्विस) की रिपोर्ट में बोस की मौत का कोई जिक्र नहीं है। दस्तावेज में उनकी स्थिति 'अज्ञात' बताई गई थी, जिसने उनकी मौत की कहानी पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए।

Subhash Chandra Bose Indian History
बाबा के कमरे से मिले वो खत और तस्वीरें जो रच गईं कहानियां (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Mar 2026 01:16 PM
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Subhash Chandra Bose Indian History : सुभाष चंद्र बोस का नाम भारतीय इतिहास में जुनून और देशभक्ति का पर्याय है, लेकिन उनके जीवन का अंतिम अध्याय आज भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। 23 जनवरी 1897 को जन्मे नेताजी की मौत को लेकर आज तक अनगिनत दावे और कई जांच आयोग अपने निष्कर्ष दे चुके हैं, लेकिन रहस्य का पर्दा नहीं उठ पाया है। क्या सच में 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हुई थी? या फिर वो सालों तक गुमनामी के साए में जिंदा रहे?

1945 का विमान हादसा: सच या कहानी?

आधिकारिक तौर पर यह माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइपे (तत्कालीन ताइहोकू) में एक विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गई थी। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी के अधिकारी कर्नल जे.जी. फिगेस ने 1946 में अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में उनकी मौत हो गई और उनका अंतिम संस्कार भी वहीं हुआ। बाद में उनकी अस्थियां टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में रखी गईं। हालांकि, यह बात दिलचस्प है कि 1947 की एक फ्रांसीसी खुफिया सेवा (सीक्रेट सर्विस) की रिपोर्ट में बोस की मौत का कोई जिक्र नहीं है। दस्तावेज में उनकी स्थिति 'अज्ञात' बताई गई थी, जिसने उनकी मौत की कहानी पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए।

जांच आयोगों के विरोधाभासी निष्कर्ष

नेताजी की मौत की सच्चाई जानने के लिए सरकार ने समय-समय पर कई आयोग बैठाए:

  • शाह नवाज खान कमीशन (1956): इसने विमान दुर्घटना में मौत की पुष्टि की, लेकिन नेताजी के भाई सुरेश चंद्र बोस ने इससे असहमति जताई।
  • खोसला आयोग (1970): इसने भी पिछली रिपोर्ट्स से सहमति जताई।
  • जस्टिस मुखर्जी कमीशन (1999): यह आयोग सबसे चौंकाने वाला रहा। इसने साफ कहा कि ताइपे में 18 अगस्त 1945 को कोई विमान दुर्घटना ही नहीं हुई थी। आयोग ने ताइवान सरकार से रिकॉर्ड मांगे, तो पता चला कि वे सिर्फ अखबारों की कतरनों पर आधारित थे। ताइवानी इतिहास संस्थान ने भी पुष्टि की कि उस दिन कोई क्रैश रिपोर्ट नहीं मिली।

क्या नेताजी रूस में थे?

कई दशकों तक एक मान्यता यह भी रही कि नेताजी सोवियत रूस में छिपकर रह रहे थे। यहां तक कहा गया कि स्टालिन इस बात से वाकिफ थे। लेकिन इस दावे को कोई ठोस सबूत या दस्तावेज कभी सामने नहीं आ सका, जिससे यह सिर्फ एक अफवाह बनकर रह गया।

'गुमनामी बाबा' का रहस्य: फैजाबाद से जुड़ा सच

नेताजी के इर्द-गिर्द घूमने वाला सबसे चर्चित सिद्धांत 'गुमनामी बाबा' या 'भगवन जी' का है। माना जाता है कि 1970 के दशक में फैजाबाद आए इस संत ने 16 सितंबर 1985 को मृत्यु का स्वागत किया।

क्या मिला था उनके पास?

बाबा की मौत के बाद उनके कमरे से बरामद सामान ने सबको हैरान कर दिया। उनके पास नेताजी के परिवार की तस्वीरें, कलकत्ता से आई चिट्ठियां और आजाद हिन्द फौज के अधिकारियों के पत्र मिले। नेताजी की भतीजी ललिता बोस ने वहां मिली वस्तुओं को देखकर उनकी पहचान की थी। हालांकि, जस्टिस विष्णु सहाय कमीशन (2016) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गुमनामी बाबा नेताजी नहीं, बल्कि उनके एक अनुयायी थे। लेकिन सवाल फिर भी बना हुआ है कि आखिर एक अनाम साधु के पास इतने गोपनीय दस्तावेज और नेताजी के परिवार के सामान कैसे पहुंचे?

सवाल अभी भी बाकी

शाह नवाज खान से लेकर जस्टिस मुखर्जी तक, हर आयोग ने अपने-अपने नजरिए से रिपोर्ट दी। जहां एक तरफ ब्रिटिश रिपोर्ट और शुरुआती आयोग विमान दुर्घटना को मानते हैं, वहीं बाद के आयोगों ने इस पर गंभीर संदेह जताया है। आज भी लाखों देशवासियों के दिल में यह सवाल जिंदा है कि क्या 'भारत के टूटे ना' वाले इस देशप्रेमी ने आखिरी सांस कहां ली? क्या वो विमान दुर्घटना का नाटक करके कहीं और चले गए थे? यह रहस्य शायद हमेशा के लिए अनसुलझा रहे, लेकिन नेताजी का तेज और उनका बलिदान भारतीय इतिहास में अमर हमेशा रहेगा। Subhash Chandra Bose Indian History

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नीतीश कुमार ने CM की कुर्सी छोड़ने का किया ऐलान, राज्यसभा पर तोड़ी चुप्पी

बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत देते नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की घोषणा कर दी है। साथ ही उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह भी स्पष्ट किया कि वे अब संसद के उच्च सदन राज्यसभा में जाने की इच्छा रखते हैं।

नीतीश कुमार
cm नीतीश कुमार
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Mar 2026 11:40 AM
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Bihar News : बिहार की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार की राजनीति से जुड़ी यह बड़ी खबर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संबंधित है। बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत देते नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की घोषणा कर दी है। साथ ही उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह भी स्पष्ट किया कि वे अब संसद के उच्च सदन राज्यसभा में जाने की इच्छा रखते हैं। अपने बयान में उन्होंने जनता के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए आगे की राजनीतिक दिशा का संकेत दिया।

मुख्यमंत्री पद छोड़ने की घोषणा

नीतीश कुमार ने अपने संदेश में कहा कि पिछले दो दशकों से भी अधिक समय तक बिहार की जनता ने उन पर भरोसा जताया और लगातार समर्थन दिया। उसी विश्वास की बदौलत उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जनता के सहयोग और भरोसे की ताकत से ही बिहार आज विकास और सम्मान की नई पहचान बना सका है। उन्होंने इस लंबे राजनीतिक सफर में साथ देने के लिए लोगों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पहले भी कई अवसरों पर वे जनता के समर्थन के लिए धन्यवाद व्यक्त कर चुके हैं।



राज्यसभा जाने की जताई इच्छा

अपने राजनीतिक जीवन को लेकर बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि जब उन्होंने सार्वजनिक जीवन और संसदीय राजनीति की शुरुआत की थी, तभी से उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों का भी सदस्य बनें। इसी इच्छा के तहत उन्होंने इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने साफ कहा कि वे इस नई भूमिका के जरिए भी बिहार और देश की सेवा करना चाहते हैं।

जनता से रिश्ता बना रहेगा

नीतीश कुमार ने अपने संदेश में यह भी भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी जनता के साथ उनका रिश्ता पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि विकसित बिहार का जो संकल्प उन्होंने लिया है, वह आगे भी जारी रहेगा और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वे लगातार काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के विकास और राज्य के हितों के लिए वे आगे भी सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। Bihar News

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