
नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से देश में GST की नई दरें लागू हो गई हैं। 22 सितंबर से देश में लागू हुई GST की नई दरें हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस लेने वालों के लिए राहत का संदेश लेकर आई हैं। अब तक इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाला 18% GST पूरी तरह खत्म कर इसे टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसका मतलब साफ है—अब प्रीमियम भुगतान में कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसके अलावा GST रिफॉर्म के तहत दूध, घी, तेल से लेकर टीवी, एसी, कार-बाइक तक की कीमतों में भी राहत मिली है। यानी अब आपके घर का बजट और इंश्योरेंस दोनों ही सुरक्षित रहेंगे। लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस को जीरो GST कैटेगरी में शामिल करने से पॉलिसीधारकों की बचत सीधे उनकी जेब में दिखाई देगी। GST Reform
नेक्स्ट जेनरेशन GST रिफॉर्म के तहत अब जरूरी सामान और सेवाओं पर नए स्लैब लागू कर दिए गए हैं। पहले 12% और 28% के स्लैब खत्म कर उन्हें 5% और 18% में समायोजित किया गया है। वहीं, लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस अब पूर्ण रूप से जीरो जीएसटी कैटेगरी में आ गया है। लंबे समय से पॉलिसीधारकों की यह मांग थी और सरकार ने इसे पूरा कर उन्हें बड़ा तोहफा दिया है। देश में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद से यह पहली बार है जब इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स पूरी तरह से हटाया गया है। यह बदलाव पर्सनल यूलिप प्लान, फैमिली फ्लोटर प्लान, सीनियर सिटीजंस प्लान और टर्म प्लान सभी पर लागू होगा। इसका मतलब साफ है—अब पॉलिसीधारक अपने प्रीमियम पर अतिरिक्त टैक्स के बिना सीधे अपनी जेब बचा सकते हैं।
अब सवाल यह है कि नई GST कटौती से आपकी बचत कितनी होगी? आइए आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए आपकी पॉलिसी का मंथली बेस प्रीमियम 30,000 रुपये है। पहले 18% जीएसटी जोड़ने पर आपको 5,400 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ते थे, यानी कुल भुगतान होता 35,400 रुपये। लेकिन अब जीरो जीएसटी होने से आपको सिर्फ 30,000 रुपये ही देना होगा। इसी तरह, 10,000 रुपये के प्रीमियम पर सीधे 1,800 रुपये की बचत होगी। मान लीजिए आप 30 साल की उम्र में 1 करोड़ रुपये का टर्म प्लान लेते हैं। पहले सालाना प्रीमियम था 15,000 रुपये। 18% जीएसटी जोड़ने पर कुल राशि बनती 17,700 रुपये। लेकिन अब टैक्स फ्री होने के बाद आपको सिर्फ 15,000 रुपये ही देने होंगे। यानि सीधे 2,700 रुपये की बचत पॉलिसीधारक की जेब में। इस बदलाव के बाद टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस दोनों ही अब पहले से काफी सस्ते और किफायती हो गए हैं।
अगर आप फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं, तो अब आपकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार ने इसे भी 18% जीएसटी से फ्री कर दिया है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपकी उम्र 35 साल, पत्नी की उम्र 33 साल और दो बच्चे हैं। पूरे परिवार के लिए 10 लाख का कवर औसतन सालाना 25,000 रुपये का प्रीमियम होता है। पहले इसमें 18% जीएसटी जोड़कर कुल 29,500 रुपये चुकाने पड़ते थे। लेकिन अब जीएसटी हटने के बाद सीधे 4,500 रुपये की बचत होगी।
जहां सरकार ने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस को GST से फ्री कर पॉलिसीधारकों को राहत दी है, वहीं बीमा कंपनियों के लिए नया नियम चुनौती बन सकता है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 22 सितंबर से कंपनियां कमीशन, ब्रोकरेज और अन्य खर्चों पर चुकाए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अब दावा नहीं कर पाएंगी। पहले कंपनियां ग्राहकों से वसूल किए गए जीएसटी से अपने मार्केटिंग, ऑफिस किराए और अन्य खर्चों का संतुलन करती थीं। अब इस सुविधा के बंद होने से कंपनियों को इनपुट लागत खुद उठानी पड़ेगी, और यह संभावना है कि कुछ कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को अपने बेस प्रीमियम में शामिल कर सकती हैं। GST Reform