तहव्वुर राणा पट-पट बकने लगा 26/11 की सच्चाई, खोला पाकिस्तान का कच्चा चिट्ठा
Tahawwur Rana
भारत
चेतना मंच
07 Jul 2025 06:32 PM
Tahawwur Rana : 26/11 मुंबई आतंकी हमले की गुत्थी सुलझाने की दिशा में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा (Terrorist Tahawwur Hussain Rana) जिसे अप्रैल 2025 में अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में धीरे-धीरे सच उगलने लगा है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा की गई पूछताछ में राणा ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिनसे पाकिस्तान की सेना, ISI और लश्कर-ए-तैयबा के आपसी गठजोड़ की परतें खुलती जा रही हैं।
"मैं पाक सेना का भरोसेमंद एजेंट था"-तहव्वुर राणा
NIA सूत्रों के मुताबिक, राणा ने दावा किया है कि वह पाकिस्तान सेना का विश्वसनीय एजेंट था और उसे खाड़ी युद्ध के दौरान सऊदी अरब में भी तैनात किया गया था। उसके इस कबूलनामे ने भारत के उन आरोपों को और मजबूती दी है, जिनमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां आतंकियों को समर्थन देती हैं। राणा ने यह भी स्वीकार किया कि उसने हमले से पहले मुंबई के कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी। उसका साथी डेविड हेडली, जो पहले ही इस केस में दोषी करार दिया जा चुका है, लश्कर-ए-तैयबा के लिए एक जासूसी नेटवर्क की तरह काम कर रहा था। राणा ने अपने इमिग्रेशन बिजनेस की आड़ में हेडली को मुंबई में एक फर्जी ऑफिस खोलने में मदद की, जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम तक पहुंचाने के लिए किया गया।
ISI और लश्कर की साजिश का पर्दाफाश
पूछताछ में राणा ने यह भी कबूल किया कि साल 2005 से ही मुंबई हमले की योजना बनाई जा रही थी। उसने बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और लश्कर-ए-तैयबा के बीच सीधा तालमेल और सक्रिय सहयोग था। NIA अब राणा के ईमेल्स, यात्रा रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर रही है, ताकि इस हमले के पीछे के गहरे नेटवर्क और संभावित अंतरराष्ट्रीय लिंक को उजागर किया जा सके।
भारत की कूटनीतिक जीत
विशेष NIA अदालत ने भी माना है कि तहव्वुर राणा से हुई पूछताछ भारत को मुंबई हमलों की व्यापक साजिश को समझने में महत्वपूर्ण मदद करेगी। इस हमले में 166 लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हुए थे। पूर्व लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने इस प्रत्यर्पण को भारत की एक कूटनीतिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि राणा की गवाही से यह साफ होगा कि पाकिस्तान सरकार और उसके सुरक्षा तंत्र की भूमिका इस आतंकी हमले में कितनी गहरी रही है।
अगले निशाने पर थे दिल्ली जैसे अन्य शहर
राणा की पूछताछ से यह भी संकेत मिले हैं कि मुंबई के अलावा दिल्ली और अन्य शहरों को भी निशाना बनाने की योजना थी। यदि समय रहते इन साजिशों का पर्दाफाश नहीं होता, तो भारत को और बड़े आतंकी हमलों का सामना करना पड़ सकता था। तहव्वुर राणा का बयान भारत की उस लंबी लड़ाई का हिस्सा है, जो वह 26/11 के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहा है। अब जांच एजेंसियों की निगाहें उस कड़ी पर हैं, जो पाकिस्तान के सैन्य तंत्र को इस हमले से सीधे जोड़ती हैं। Tahawwur Rana