तेज प्रताप का आरोप है कि ये चेहरे उन्हें उनके भाई तेजस्वी यादव से दूर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और पार्टी में उनकी भूमिका को सीमित करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं।

Bihar News : बिहार की सियासत में अपने बेबाक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। इस बार तेज प्रताप यादव ने संकेतों की भाषा छोड़कर सीधे-सीधे उन पांच नेताओं के नाम सार्वजनिक किए हैं, जिन्हें वे अपने खिलाफ साजिश का सूत्रधार मानते हैं। तेज प्रताप का आरोप है कि ये चेहरे उन्हें उनके भाई तेजस्वी यादव से दूर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और पार्टी में उनकी भूमिका को सीमित करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं।
तेज प्रताप यादव के मुताबिक, जिन चेहरों पर उन्हें सबसे ज्यादा शक है, उनमें -
1) मुकेश रौशन: तेज प्रताप ने जिन नामों को सबसे ऊपर रखा है, उनमें मुकेश रौशन का नाम पहले नंबर पर है। वे वैशाली की महुआ सीट से विधायक रह चुके हैं। दिलचस्प यह है कि 2015 में तेज प्रताप खुद महुआ से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, बाद में उन्होंने यह सीट मुकेश रौशन के लिए छोड़ी। समय के साथ रिश्तों में दूरी बढ़ी और अब वही नाम तेज प्रताप के निशाने पर है।
2) संजय यादव: दूसरे नंबर पर तेज प्रताप ने संजय यादव का नाम लिया है, जो RJD के राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें तेजस्वी यादव का बेहद करीबी रणनीतिकार माना जाता है। तेज प्रताप पहले भी इशारों में कह चुके हैं कि कुछ “मैनेजमेंट टाइप लोग” परिवार और संगठन के बीच गलतफहमियां बढ़ाते हैं। इस बार उनका आरोप ज्यादा सीधा और तीखा दिखा।
3) रमीज नेमत: तीसरे नाम के तौर पर तेज प्रताप ने रमीज नेमत को चिन्हित किया है। पार्टी और राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान तेजस्वी के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में होती है, जो अक्सर उनके साथ बैठकों और दौरों में नजर आते हैं। तेज प्रताप का दावा है कि ऐसे लोग सूचनाओं को “फिल्टर” करके नेतृत्व तक पहुंचाते हैं और इससे उनके खिलाफ माहौल बनाया जाता है।
4) शक्ति सिंह यादव: चौथे नंबर पर RJD के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव का नाम है। टीवी बहसों में पार्टी का पक्ष रखने वाले चेहरों में वे प्रमुख रहे हैं। तेज प्रताप का आरोप है कि सार्वजनिक मंच पर पार्टी लाइन मजबूत दिखती है, लेकिन संगठन के अंदरूनी खेल में उनके खिलाफ नैरेटिव बनाने का काम होता है—और इसमें कुछ ‘प्रभावशाली चेहरे’ भूमिका निभाते हैं।
5) सुनील सिंह: पांचवें नाम के तौर पर तेज प्रताप ने सुनील सिंह को रखा है, जो विधान परिषद सदस्य हैं और बिस्कोमान के अध्यक्ष भी। उनकी पहचान सहकारिता जगत में मजबूत रही है और उन्हें परिवार के करीबी दायरे से भी जोड़ा जाता रहा है। तेज प्रताप का दावा है कि सुनील सिंह अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर उनके राजनीतिक कद को “कम” करने की कोशिश करते हैं।
तेज प्रताप ने इन नेताओं को जयचंद कहकर सीधे तौर पर विश्वासघात के प्रतीक से जोड़ दिया। राजनीति में यह शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए बोला जाता है जिन पर अपने ही खेमे के खिलाफ काम करने का आरोप लगे। तेज प्रताप के शब्दों का साफ संकेत यह है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने यह संदेश रखना चाहते हैं कि उनके खिलाफ साजिश बाहर से नहीं, भीतर से हो रही है। Bihar News